(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) न्यायालय द्वितीय अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अनूपपुर आर.पी.सेवेतिया जिला-अनूपपुर के न्यायालय के विशेष प्रकरण क्र. 32/18 थाना अमरकंटक के अपराध क्र. 03/18 धारा 363, 366क, 376(2)एन, 376(2)आई, 370(4) सहपठित धारा 34 भादवि व धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट एवं 3(2)5 अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के आरोपीगण मनीष कुमार गुप्ता पिता कोदूलाल गुप्ता उम्र 28 वर्ष,मंजू गुप्ता पति मनीष कुमार गुप्ता उम्र 36 वर्ष,नवल सिंह गोंड पिता कुंवर सिंह उम्र 19 वर्ष,कुसुम बाई उर्फ मंझली बाई पति अशोक कुमार जोगी उम्र 50 वर्ष,रामबाई पत्नी रज्जू केवट उम्र 24 वर्ष, राजभान केवट पिता रज्जू केवट उम्र 24 वर्ष सभी निवासी ग्राम मौहारटोला पाली, चौकी फुनगा,थाना भालूमाडा जिला अनूपपुर तथा ललिता बाई पति रामप्रसाद जोगी, उम्र 24 वर्ष निवासी ग्राम हिण्डालको अमरकंटक जिला अनूपपुर सभी आरोपीगण को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 3 लाख 60 हजार रुपए जुर्माने के दण्ड से दण्डित किया है। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) रामनरेश गिरि द्वारा की गयी है।
अभियोजन मीडिया प्रभारी राकेश कुमार पाण्डेय ने निर्णय की जानकारी देते हुए मुताबिक पुलिस डायरी से बताया कि पीडिता कक्षा 6वीं तक पढी थी तथा घरेलू काम करती थी, उसके साथ दादी रहती थी तथा पीडिता का महिला आरोपी ललिता जोगी के घर में आना-जाना होता रहता था,पीडिता आरोपी ललिता के घर उसके बुलाने पर खाना बनाने गई थी, जब पीडिता आरोपी ललिता के यहां खाना बनाने गई थी तब ललिता के घर ललिता के घर मंजू उसका रिश्तेदार नवल और लाला आए थे, ललिता के घर में सभी लोग खाना खाए, खाना खाने के बाद पीडिता से ललिता जोगी बोली कि मेरी बहन मंजू गाडी लेकर आई है, तुम हमारे साथ चलो घूमकर आते हैं, तब पीडिता ललिता और मंजू के साथ पीडिता गाडी में बैठ गई, गाडी में पीडिता के नवल, लाला, एवं कोतमा का ड्राइवर था। मंदिर घूमकर ये सभी लोग नर्सरी के पास पहूंचे वहां पर कोतमा वाले ड्राईवर ने गाडी रोक दी, तब ललिता पीडिता से बोली कि तुम मंजू के साथ चली जाओ तब पीडिता बहुत मना की पर मंजू और नवल दोनों हाथ पकड लिए लाला ने पीडिता का मुंह दबा दिया और उसे जबरजस्ती गाडी में बैठाकर गाडी मंजू के घर पाली में बाहर रोका और पीडिता को जबरजस्ती चारों लोग घर के अंदर ले जाकर मंजू के घर में ही बारी-बारी से पीडिता के साथ बलात्कार किया। इसके बाद मंजू ने पीडिता को अपने घर गांव पाली में ही बंदी बनाकर 03-04 माह तक रखा, इस दौरान मंजू का पति मनीष गुप्ता रोज पीडिता के साथ जबरन बलात्कार करता रहा,मंजू और मनीष दोनों रोज नए नए लडकों को लेकर आते थे और उनसे पैसा रूपए लेकर पीडिता का बलात्कार करवाते थे, बीच-बीच में कई बार जब मंजू के ग्राहक आते थे तो मंजू और मनीष उसी के गांव पाली के मंझली बाई और रामबाई के घर ले जाते जहां पर मझली बाई और रामबाई पहले से ग्राहक तैयार करके रखते थे।मंजू और मनीष इसके लिए उनसे पैसा लिया करते थे।मझली बाई के घर में पीडिता के साथ धनपुरी और बुढार की और लडकियां थीं, इसके अतिरिक्त उनके यहां राजेन्द्रग्राम की भी कुछ लडकियां थीं,मंजू और मनीष जबरजस्ती पीडिता के साथ बंदी बनाकर बलात्कार करवाते थे।बाद में थाना अमरकंटक के द्वारा प्रकरण में मामला कायम कर विवेचना में लिया गया। प्रकरण की विवेचना एडीओपी राजेन्द्रग्राम मलखान सिंह द्वारा की गई थी। प्रकरण की विवेचना पश्चात अभियोग पत्र समीक्षा हेतु जिला अभियोजन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिला अभियोजन अधिकारी रामनरेश गिरि ने प्रकरण की समीक्षा में आवश्यक सभी साक्ष्यों एवं अतिरिक्त साक्ष्यों का संकलन कराया,समीक्षा पश्चात प्रकरण माननीय न्यायालय में पेश किया गया, अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रामनरेश गिरि ने मामले को न्यायालय में साबित करने के लिए 19 गवाह प्रस्तुत किए तथा उन्होंने 43 दस्तावेजों के माध्यम से न्यायालय में मामले को प्रमाणित कराया। प्रकरण में दिनांक 03/01/2018 को प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गई थी,न्यायालय में 09/10/2018 से साक्ष्य प्रारंभ हुआ था और दिनांक 22/09/2022 को न्यायालय ने निर्णय देते हुए आरोपीगण को उपरोक्त दण्ड से दण्डित किया है।
आरोपीगण ने न केवल पीडिता के साथ अपराध कारित किया है,बल्कि सम्पूर्ण समाज को कलंकित करने वाला अपराध कारित किया है।मामले मे न्यायालय ने 08 आरोपियों को अधिकतम 20 वर्ष के कारावास से दण्डित किया है,जो ऐसे अपराधियों के लिए उदाहरण साबित होगी।
न्यायालय ने पीडित बालिका के शैक्षणिक एवं मानसिक विकास के लिए प्रतिकर के रूप में 4 लाख रुपए का प्रतिकर देने का भी आदेश पारित किया है।
अभियोजन मीडिया प्रभारी राकेश कुमार पाण्डेय ने निर्णय की जानकारी देते हुए मुताबिक पुलिस डायरी से बताया कि पीडिता कक्षा 6वीं तक पढी थी तथा घरेलू काम करती थी, उसके साथ दादी रहती थी तथा पीडिता का महिला आरोपी ललिता जोगी के घर में आना-जाना होता रहता था,पीडिता आरोपी ललिता के घर उसके बुलाने पर खाना बनाने गई थी, जब पीडिता आरोपी ललिता के यहां खाना बनाने गई थी तब ललिता के घर ललिता के घर मंजू उसका रिश्तेदार नवल और लाला आए थे, ललिता के घर में सभी लोग खाना खाए, खाना खाने के बाद पीडिता से ललिता जोगी बोली कि मेरी बहन मंजू गाडी लेकर आई है, तुम हमारे साथ चलो घूमकर आते हैं, तब पीडिता ललिता और मंजू के साथ पीडिता गाडी में बैठ गई, गाडी में पीडिता के नवल, लाला, एवं कोतमा का ड्राइवर था। मंदिर घूमकर ये सभी लोग नर्सरी के पास पहूंचे वहां पर कोतमा वाले ड्राईवर ने गाडी रोक दी, तब ललिता पीडिता से बोली कि तुम मंजू के साथ चली जाओ तब पीडिता बहुत मना की पर मंजू और नवल दोनों हाथ पकड लिए लाला ने पीडिता का मुंह दबा दिया और उसे जबरजस्ती गाडी में बैठाकर गाडी मंजू के घर पाली में बाहर रोका और पीडिता को जबरजस्ती चारों लोग घर के अंदर ले जाकर मंजू के घर में ही बारी-बारी से पीडिता के साथ बलात्कार किया। इसके बाद मंजू ने पीडिता को अपने घर गांव पाली में ही बंदी बनाकर 03-04 माह तक रखा, इस दौरान मंजू का पति मनीष गुप्ता रोज पीडिता के साथ जबरन बलात्कार करता रहा,मंजू और मनीष दोनों रोज नए नए लडकों को लेकर आते थे और उनसे पैसा रूपए लेकर पीडिता का बलात्कार करवाते थे, बीच-बीच में कई बार जब मंजू के ग्राहक आते थे तो मंजू और मनीष उसी के गांव पाली के मंझली बाई और रामबाई के घर ले जाते जहां पर मझली बाई और रामबाई पहले से ग्राहक तैयार करके रखते थे।मंजू और मनीष इसके लिए उनसे पैसा लिया करते थे।मझली बाई के घर में पीडिता के साथ धनपुरी और बुढार की और लडकियां थीं, इसके अतिरिक्त उनके यहां राजेन्द्रग्राम की भी कुछ लडकियां थीं,मंजू और मनीष जबरजस्ती पीडिता के साथ बंदी बनाकर बलात्कार करवाते थे।बाद में थाना अमरकंटक के द्वारा प्रकरण में मामला कायम कर विवेचना में लिया गया। प्रकरण की विवेचना एडीओपी राजेन्द्रग्राम मलखान सिंह द्वारा की गई थी। प्रकरण की विवेचना पश्चात अभियोग पत्र समीक्षा हेतु जिला अभियोजन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिला अभियोजन अधिकारी रामनरेश गिरि ने प्रकरण की समीक्षा में आवश्यक सभी साक्ष्यों एवं अतिरिक्त साक्ष्यों का संकलन कराया,समीक्षा पश्चात प्रकरण माननीय न्यायालय में पेश किया गया, अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रामनरेश गिरि ने मामले को न्यायालय में साबित करने के लिए 19 गवाह प्रस्तुत किए तथा उन्होंने 43 दस्तावेजों के माध्यम से न्यायालय में मामले को प्रमाणित कराया। प्रकरण में दिनांक 03/01/2018 को प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गई थी,न्यायालय में 09/10/2018 से साक्ष्य प्रारंभ हुआ था और दिनांक 22/09/2022 को न्यायालय ने निर्णय देते हुए आरोपीगण को उपरोक्त दण्ड से दण्डित किया है।
आरोपीगण ने न केवल पीडिता के साथ अपराध कारित किया है,बल्कि सम्पूर्ण समाज को कलंकित करने वाला अपराध कारित किया है।मामले मे न्यायालय ने 08 आरोपियों को अधिकतम 20 वर्ष के कारावास से दण्डित किया है,जो ऐसे अपराधियों के लिए उदाहरण साबित होगी।
न्यायालय ने पीडित बालिका के शैक्षणिक एवं मानसिक विकास के लिए प्रतिकर के रूप में 4 लाख रुपए का प्रतिकर देने का भी आदेश पारित किया है।

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