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जिले के तीन नवगठित नगर परिषद डोला,डूमर कछार एवं बनगवां मे संविलियन के नाम पर की सभी भर्तियां निरस्त

 

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)

अनूपपुर (अंंचलधारा) जिले के डोला, डूमर कछार एवं बनगवां नगर परिषद में 300 से अधिक लोगों को संविलियन के नाम पर की गई नियुक्ति को मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव हर्षल पंचोली ने निरस्त कर दिया हैा उपसचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग के हर्षल पंचोली ने जारी आदेश में कहा है कि 
मध्यप्रदेश शासन नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय, भोपाल 15 जुलाई 2022 क्रमांक 3339/414/ 2022/18-1 ग्राम पंचायत डूमरकछार के मानदेय कर्मचारियों को नवगठित नगर परिषद डूमरकछार, डोला, बनगवा जिला अनूपपुर और नगर परिषद बकहो जिला शहडोल में संविलियन किये जाने के संबंध में जिला चयन समिति की कार्यवाही दिनांक 06/02/2021 की पुष्टि के प्रशासक संकल्प क्रमांक 05 दिनांक 25/02/2021 को मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 7- छ एवं मध्यप्रदेश नगर पालिका सेवा (वेतनमान एवं भत्ता) नियम, 1967 के प्रावधानों के विपरीत होने से विभागीय समसंख्यक आदेश दिनांक 02/03/2022 से निलंबित किया गया था। अभिलेखों की जांचोपरांत एवं संबंधित पक्षों की सुनवाई उपरांत ज्ञात होता है कि उक्त संकल्प विधिवत पारित नहीं किया गया था तथा उस संकल्प पर प्रशासक के हस्ताक्षर भी नहीं थे। उक्त कार्यवाही नियम विरूद्ध पायी जाने से जिला चयन समिति की कार्यवाही दिनांक 06/02/2021 की पुष्टि के प्रशासक संकल्प कमांक 05 दिनांक 25/02/2021 को मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम,1961 की धारा 323 (2) में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत निरस्त अपास्त किया जाता है। मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार इसके अलावा बकहो जिला शहडोल नगरपरिषद में भी हुई संविलियन की द्वारा की गई सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया है।
              ज्ञात हो कि इन सभी नवगठित नगरपरिषदो में फर्जीवाड़ा के द्वारा काफी नियुक्तियां थी जिस पर नगरीय विकास और आवास विभाग ने जांच कराई जांच उपरांत यह कार्रवाई की गई।

अप्रैल माह मे 
आई थी जांच टीम

जिले में नवगठित तीन नगर परिषद डोला,डुमरकछार व बनगवां में हुई 300 से ज्यादा संविलियन नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी की शिकायत पर अप्रैल माह मे भोपाल से आई पांच सदस्यीय जाँच टीम ने जिलास्तरीय चयन समिति के सदस्यों कर्मचारियों व शिकायतकर्ता के बयान लिए थे। इस दौरान जांच टीम के सदस्यों द्वारा जांच के दौरान नियुक्ति में अधिकारियों के साथ ही लगभग 50 लोगों के भी बयान लिए गए थे। फर्जी संविलियन मामले मे शिकायतकर्ताओं द्वारा आरोप लगाया गया था कि नगर परिषद गठन के दौरान ऐसे लोगों का संविलियन किया गया जो पंचायत क्षेत्र में ना तो रहते हैं ना उन्होंने कभी काम किया है लेकिन पूरी तरह से सचिव द्वारा मिलीभगत करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कर कूट रचना रहते हुए अपने नात रिश्तेदार व करीबियों को संविलियन कर दिया गया।

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