(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंचलधारा) जिला मुख्यालय में कार्यरत नोटरी का व्यवसाय कर रहे अधिवक्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार नई दिल्ली को जिला कलेक्टर अनूपपुर के माध्यम से नोटरी संशोधन विधेयक 2021 में आपत्ति दर्ज संबंधित ज्ञापन प्रेषित किया है।उन्होंने ज्ञापन में उल्लेखित किया है कि जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश में कार्यरत
नोटरीज द्वारा नोटरी संशोधन विधेयक 2021 में निम्न बिन्दुओं पर ध्यानाकर्षण कराते हुये निम्न निवेदन करते हैं कि-यह कि नोटरी अधिनियम 1952 और उससे संबंधित नोटरी नियम 1956 में संशोधन विधेयक द्वारा जो यह संशोधन किया जाना प्रस्तावित है कि नोटरी को जारी अनुज्ञप्ति मात्र दो बार 5-5 वर्ष के लिए किया जा सकेगा, अर्थात नोटरी का कुल कार्यकाल 15 वर्षों का होगा,उपयुक्त व न्याय संगत नही है। क्योकि यदि इस पर विचार करें कि नोटरी कुल 15 वर्षों तक नोटरी का व्यवसाय करेगा, तो उसके बाद उसके भविष्य का क्या होगा, जो एक महत्वपूर्ण विचारणीय प्रश्न हैं।यह कि नोटरी अधिनियम और नियम में जो यह संशोधन प्रस्तावित है कि नोटरी की अधिकतम आयु 65 वर्ष तक व्यवसाय कर सकेगा, संशोधन किया जाना प्रस्तावित है, वह भी किसी भी दृष्टिकोण से उपयुक्त व न्याय संगत नही है।क्योंकि 65 वर्ष बाद उसके व उसके आश्रित परिवार को जीवन यापन के लिए वास्तविक रूप से नोटरी व्यवसाय की आवश्यकता जीवकोपार्जन के लिए होगी, तो उससे नोटरी व्यवसाय का अनुज्ञप्ति छीन ली जायेगी, इस दशा में उस नोटरी की भूखों मरने की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी । इस दृष्टिकोण से भी उपयुक्त नहीं है,जो यह देखने में आता है कि नोटरी अनुज्ञप्ति प्राप्त होने के बाद वह अधिवक्ता अपना विधि व्यवसाय को लगभग छोडकर नोटरी व्यवसाय में संलिप्त हो जाता है,और उस पर पूर्णरूपेण उसी पर आश्रित हो जाता है,और विधि व्यवसाय से विलग हो जाता है, इस स्थिति में नोटरी अनुज्ञप्ति समाप्त होने के बाद वह विधि व्यवसाय करने लायक भी नही बचता, इस कारण ऐसा संशोधन अप्राकृतिक होनें एवं न्याय संगत न होने से संशोधन किए जाने योग्य नही है।यह कि जैसा कि विधि मंत्रालय की मंशा है कि नए एवं युवा अधिवक्ताओं को नोटरी का अनुज्ञप्ति दिया जाये, यह भी उपयुक्त नहीं है। क्योंकि नए और युवा अधिवक्ताओं का विधि व्यवसाय सीखने एवं अर्जित करने का समय होता है, इस समय यदि उन्हे 15 वर्षों के लिए नोटरी की अनुज्ञप्ति दी गई तो वह विधि
व्यवसाय से अलग हो जाएगा, और 15 वर्ष पश्चात उसकी स्थिति न तो नोटरी व्यवसाय की बचेगी, और न विधि व्यवसाय की बचेगी, और वह व उसका आश्रित परिवार भूखों मरने की स्थिति में आ जाएगी।यह कि संसद और विधायक को एक बार निर्वाचित होने पर उन्हे आजीवन
पेंशन और सारी सरकारी सुविधाये मुफ्त में प्राप्त होती हैं, जबकि नोटरी अपना व्यवसाय कर न्यूनतम शुल्क लेकर नोटरी कार्य सम्पादित कर अपना जीवन यापन करता है और यदि उससे उसका व्यवसाय 15 वर्ष बाद छीन लिया जाना असंवैधानिक एवं उसके मूल अधिकारों के विरुद्ध होगा।यह कि यदि विधि मंत्रालय वास्तव में नोटरी अधिनियम और नियम में गंभीरता से संशोधन करना चाहता है तो नोटरी लाइसेंस 50 वर्ष के ऊपर के अधिवक्ताओं को 30 वर्षों तक या उसके जीवनकाल तक दिया जाना चाहिए,जिससे वह विधि का दीर्घकालीन अनुभवं का उपयोग एवं नोटरी व्यवसाय कर समाज को लाभ पहुंचाएगा, जिससे नोटरी कार्य की पवित्रता एवं सुचिता बनी रहेगी। नोटरी के कार्य में लगे अधिवक्ता गणों ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय से सादर निवेदन किया है कि नोटरी संशोधन विधेयक जिसकी वर्तमान में कोई आवश्यकता नही है उसे पास कर कानूनी मान्यता प्रदान न की जाए। ज्ञापन प्रेषित करने वाले प्रमुख नोटरी चंद्रकांत पटेल एडवोकेट, जगदीश पांडे एडवोकेट, आर.के. राठौर एडवोकेट,संजीव कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट, प्रमोद कुमार पटेल एडवोकेट, गणेश प्रसाद केवट एडवोकेट, के.डी. राठौर एडवोकेट, भूपेंद्र सिंह एडवोकेट आदि प्रमुख हैं।
नोटरीज द्वारा नोटरी संशोधन विधेयक 2021 में निम्न बिन्दुओं पर ध्यानाकर्षण कराते हुये निम्न निवेदन करते हैं कि-यह कि नोटरी अधिनियम 1952 और उससे संबंधित नोटरी नियम 1956 में संशोधन विधेयक द्वारा जो यह संशोधन किया जाना प्रस्तावित है कि नोटरी को जारी अनुज्ञप्ति मात्र दो बार 5-5 वर्ष के लिए किया जा सकेगा, अर्थात नोटरी का कुल कार्यकाल 15 वर्षों का होगा,उपयुक्त व न्याय संगत नही है। क्योकि यदि इस पर विचार करें कि नोटरी कुल 15 वर्षों तक नोटरी का व्यवसाय करेगा, तो उसके बाद उसके भविष्य का क्या होगा, जो एक महत्वपूर्ण विचारणीय प्रश्न हैं।यह कि नोटरी अधिनियम और नियम में जो यह संशोधन प्रस्तावित है कि नोटरी की अधिकतम आयु 65 वर्ष तक व्यवसाय कर सकेगा, संशोधन किया जाना प्रस्तावित है, वह भी किसी भी दृष्टिकोण से उपयुक्त व न्याय संगत नही है।क्योंकि 65 वर्ष बाद उसके व उसके आश्रित परिवार को जीवन यापन के लिए वास्तविक रूप से नोटरी व्यवसाय की आवश्यकता जीवकोपार्जन के लिए होगी, तो उससे नोटरी व्यवसाय का अनुज्ञप्ति छीन ली जायेगी, इस दशा में उस नोटरी की भूखों मरने की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी । इस दृष्टिकोण से भी उपयुक्त नहीं है,जो यह देखने में आता है कि नोटरी अनुज्ञप्ति प्राप्त होने के बाद वह अधिवक्ता अपना विधि व्यवसाय को लगभग छोडकर नोटरी व्यवसाय में संलिप्त हो जाता है,और उस पर पूर्णरूपेण उसी पर आश्रित हो जाता है,और विधि व्यवसाय से विलग हो जाता है, इस स्थिति में नोटरी अनुज्ञप्ति समाप्त होने के बाद वह विधि व्यवसाय करने लायक भी नही बचता, इस कारण ऐसा संशोधन अप्राकृतिक होनें एवं न्याय संगत न होने से संशोधन किए जाने योग्य नही है।यह कि जैसा कि विधि मंत्रालय की मंशा है कि नए एवं युवा अधिवक्ताओं को नोटरी का अनुज्ञप्ति दिया जाये, यह भी उपयुक्त नहीं है। क्योंकि नए और युवा अधिवक्ताओं का विधि व्यवसाय सीखने एवं अर्जित करने का समय होता है, इस समय यदि उन्हे 15 वर्षों के लिए नोटरी की अनुज्ञप्ति दी गई तो वह विधि
व्यवसाय से अलग हो जाएगा, और 15 वर्ष पश्चात उसकी स्थिति न तो नोटरी व्यवसाय की बचेगी, और न विधि व्यवसाय की बचेगी, और वह व उसका आश्रित परिवार भूखों मरने की स्थिति में आ जाएगी।यह कि संसद और विधायक को एक बार निर्वाचित होने पर उन्हे आजीवन
पेंशन और सारी सरकारी सुविधाये मुफ्त में प्राप्त होती हैं, जबकि नोटरी अपना व्यवसाय कर न्यूनतम शुल्क लेकर नोटरी कार्य सम्पादित कर अपना जीवन यापन करता है और यदि उससे उसका व्यवसाय 15 वर्ष बाद छीन लिया जाना असंवैधानिक एवं उसके मूल अधिकारों के विरुद्ध होगा।यह कि यदि विधि मंत्रालय वास्तव में नोटरी अधिनियम और नियम में गंभीरता से संशोधन करना चाहता है तो नोटरी लाइसेंस 50 वर्ष के ऊपर के अधिवक्ताओं को 30 वर्षों तक या उसके जीवनकाल तक दिया जाना चाहिए,जिससे वह विधि का दीर्घकालीन अनुभवं का उपयोग एवं नोटरी व्यवसाय कर समाज को लाभ पहुंचाएगा, जिससे नोटरी कार्य की पवित्रता एवं सुचिता बनी रहेगी। नोटरी के कार्य में लगे अधिवक्ता गणों ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय से सादर निवेदन किया है कि नोटरी संशोधन विधेयक जिसकी वर्तमान में कोई आवश्यकता नही है उसे पास कर कानूनी मान्यता प्रदान न की जाए। ज्ञापन प्रेषित करने वाले प्रमुख नोटरी चंद्रकांत पटेल एडवोकेट, जगदीश पांडे एडवोकेट, आर.के. राठौर एडवोकेट,संजीव कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट, प्रमोद कुमार पटेल एडवोकेट, गणेश प्रसाद केवट एडवोकेट, के.डी. राठौर एडवोकेट, भूपेंद्र सिंह एडवोकेट आदि प्रमुख हैं।
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