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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वेबिनार संवाद से मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है-श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी

   

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)

अनूपपुर (अंचलधारा) इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में “एक असमान दुनियाँ में मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का  विश्वविद्यालय के कुलगीत के गायन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति माननी प्रोफेसर श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने की, अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि 'किसी भी व्यक्ति के सफलता की कुंजी हम मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे तो हम अच्छा सोच सकेंगे, अच्छा व्यवहार कर सकेंगे तथा उचित निर्णय ले सकेंगे। मानसिक रुग्णता से ग्रसित व्यक्ति का सर्वप्रथम प्रभाव उसकी सामाजिकता पर पड़ता है और वह धीरे-धीरे एकांत की तरफ बढ़ने लगता है; वह लोगों से मिलने से बचता है तथा बात करने से डरता है। चिंता, तनाव, घबराहट तथा दबाव मानसिक रुग्णता के लक्षण हैं। कोई शारीरिक बीमारी, कार्य का अत्यधिक दबाव, अत्यधिक एवं अव्यवहारिक अपेक्षाएं इत्यादि मानसिक रुग्णता के कारण हो सकते हैं। यदि हम मानसिक रूप से स्वस्थ हैं तो हम गलत निर्णय नहीं लेंगे। कोविड-19 के दौर में मानसिक अवसाद बहुत ज्यादा देखने को मिला है। इससे बचने के कुछ सामान्य से उपाय हैं, जैसे - संवाद बनाए रखना, प्रसन्नता के अवसर तलाशना, सकारात्मक कार्यों में व्यस्त रहना यथा- कविताएं लिखना, कहानियां पढ़ना, खेलकूद, प्रकृति से तादात्म्य स्थापित करना, पर्यटन इत्यादि। जीवन में सफल होने के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं-हमारा मनोबल कैसा है, हमारा मनोरथ तथा मनोगत क्या है; यह निर्धारित करेगा कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य एवं चिंतन कैसा होगा'। 
वेबीनार के प्रथम सत्र में बतौर विशेषज्ञ एनआईटी, राउरकेला, से डॉ.रामकृष्ण विश्वाल ने ‘जनजातीय समाज के मानसिक स्वास्थ्य’ विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समाज में हो रहे औद्योगीकरण से उपजे विस्थापन से इस समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। आदिवासी समुदाय की संस्कृति को संरक्षित करके ही हम उनके मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के मनोविज्ञान विभाग से जुड़े डॉ. ज्ञानेश कुमार तिवारी जी ने बताया की धनात्मक मनोवृति धारण कर हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। पांडिचेरी विश्वविद्यालय के व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार सिआ जी ने बतौर मुख्य वक्ता वृद्ध व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए बताया कि हमें अपने बुजुर्ग परिवारजनों के साथ सहज एवं सौम्य व्यवहार करना चाहिए। उनके साथ संवाद करने से न केवल उनका अपितु हमारा तथा हमारे बच्चों का भी मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। 
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रमन्ना ट्रस्ट से जुड़े योग प्राण विद्या के योगाचार्य रिटायर्ड विंग कमांडर श्री एन जे रेड्डी जी ने सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य की आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की तथा प्रतिभागियों को योग प्राण विद्या का प्रशिक्षण कराया। 
मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं समाज विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफ़ेसर राकेश सिंह जी ने वेबिनार में जुड़े सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की प्रस्ताविकी मनोविज्ञान विभाग के सह-आचार्य डॉ. ललित कुमार मिश्र ने प्रस्तुत की। आभार ज्ञापन डॉक्टर भरत चंद्र साहू जी ने तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रज्ञेश कुमार मिश्र ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के गणमान्य शिक्षकों के साथ मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ। 

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