Anchadhara

अंचलधारा
!(खबरें छुपाता नही, छापता है)!

कांग्रेस की कमलनाथ सरकार तो किसान फसल बीमा का प्रीमियम भी डकार गई पत्रकार वार्ता में शशांक श्रीवास्तव

 

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)

अनूपपुर (अंचलधारा) भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में किसानों के मुद्दे को लेकर कटनी के महापौर भारतीय जनता पार्टी के नेता शशांक श्रीवास्तव की उपस्थिति में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया।जिसमें भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष बृजेश गौतम, पूर्व जिला अध्यक्ष रामदास पुरी, महामंत्री भूपेंद्र सिंह सेंगर, मीडिया प्रभारी राजेश सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुई।कटनी महापौर शशांक श्रीवास्तव ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लगातार अपनी उन्नति और खुशहाली के लिए तरस रहे किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने ऐतिहासिक कानूनी प्रावधान किए हैं।अधिकारों से वंचित किसानों को अपने उत्पाद का मूल्य निर्धारण करने और उसे अपनी इच्छा के अनुरूप स्थान पर बेचने आदि की स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए 3 विधायकों के माध्यम से कानूनी प्रावधान किए गए हैं।जिसमें पहला कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण)विधेयक 2020, दूसरा कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020, तीसरा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020।उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र एक बाजार की अवधारणा विकसित करने के लिए यह बाधा मुक्त व्यवस्था किसानों के लिए की गई है।दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी दिन-रात पसीना बहाने वाले किसानों को अपनी फसलों का मूल्य स्वयं निर्धारित करने का अधिकार नहीं दिया गया और उसे दलालों के जबड़े में डाल कर रखा गया।किसी भी प्रकार का उत्पात करने वालों को अपने उत्पादन का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार सदैव से रहा तब प्रश्न आता है कि कृषि प्रधान देश का  यह अधिकार किसानों को क्यों नहीं दिया गया आज जब किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का कानूनी प्रयास किया जा रहा है तब कांग्रेस और विपक्षी दलों का विरोध यह इंगित करता है कि किसानों से दलाली खाने वालों से इनके संबंध क्या है उन्होंने कहा कि मजेदार बात तो यह है कि कांग्रेस और अन्य दल के जो नेता आज कानूनी सुधारों का विरोध कर रहे हैं वही नेता संसद के भीतर से लेकर बाहर तक इनकी वकालत करते थे।  स्पष्ट है कि इनका दोहरा चरित्र समाज के सामने उजागर हुआ है राजा नवाब अंग्रेज और कांग्रेस तक के शासनकाल में किसानों के हित में ऐसा कोई काम नहीं हो सका जिसका उल्लेख किया जा सके लेकिन आज जब देश के किसान को अभिमान और स्वाभिमान देने के प्रयास किए जा रहे हैं तब विरोधी दल के पेट में मरोड़ हो रही है।सच तो यह है कि देश और देश के लोगों के हित में जब भी फैसले लिए जाते हैं तब काग्रेस को विरोध ही करना होता है नागरिकता संशोधन कानून की बात तो कश्मीर से धारा 370 हटाने का विषय हो मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के कलंक से मुक्ति दिलाने का निर्णय हो या फिर भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण की बात हो कांग्रेस ने हर राष्ट्रीय विषय पर देश का वातावरण खराब करने का प्रयास किया है। दुर्भाग्य से नए कानूनों के संदर्भ में विरोधी दलों ने किसानों के बीच भ्रम पैदा करने का पाप किया है।जिसमें भय दिखाकर राजनीति करने का इनका एजेंडा चलता रहे उन्होंने कहा कि किसान को अपने उत्पाद का दाम तय करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए क्या किसान को अपना उत्पाद किसी भी राज्य में जाकर बेचने की छूट नहीं मिलना चाहिए क्या किसान के उत्पाद पर दलाली खाने की प्रथा को जारी रखना चाहिए क्या किसान को अपना उत्पाद बेचने के लिए आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से बाजार तलाशने का अधिकार नहीं है क्या किसान इस देश में अपनी फसल से संबंधित निर्माण उद्योग लगाने का अधिकारी नहीं है क्या किसान को चुंगी और टैक्स की चक्की में पीसने के लिए छोड़ देना चाहिए क्या किसान घर से फसल बेचकर अपना यातायात खर्चे बचाने का अधिकारी नहीं है।यदि कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों को किसानों को मिलने वाले इन अधिकारों से चिढ़ है और वह किसान को निरंतर निरीह और कमजोर देखना चाहते हैं तो उनकी यह अमानवीय सोच उनको मुबारक हो।लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार अब किसान को लाचार नहीं रहने देगी।नए कानूनों का लाभ किसान को मिलना प्रारंभ हो गया है 2 दिन पूर्व ही होशंगाबाद में झांसा देने के एक उद्योगपति के प्रयास इसी कानून के कारण विफल हुए हैं। जिसकी प्रशंसा सिर्फ हम नहीं कर रहे कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पराज पटेल ने भी की है।जिस कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष किसानों से 10 दिन में कर्ज माफी जैसे बड़े बड़े वादे करके लापता हो जाता है उस पार्टी के लोगों से किसानों के प्रति संवेदनशीलता की उम्मीद नहीं की जा सकती।जिस पार्टी का मुख्यमंत्री (कमलनाथ) भारी ओलावृष्टि और बाढ़ के हालातों में मंदसौर श्योपुर भिंड तक टेलीस्कोप लगाकर भी किसान के खेत की ओर नहीं देखता हो उस पार्टी की सरकार किसानों के हित में  क्या कदम उठाएगी।आज पूरे देश की विशेषता मध्यप्रदेश की जनता जानती है कि मध्यप्रदेश किसान वेलफेयर स्टेट है इसलिए पिछले दिनों कांग्रेश के बंद के आह्वान को स्वयं किसानों ने ही फेल कर दिया।मजेदार बात तो यह है कि मध्यप्रदेश का पहला राज्य है जिसने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से 4000 रुपए की वृद्धि करके 10 हजार रुपए किसान को प्रदेश में 78 लाख से अधिक किसानों के खातों में  3 हजार 705 करोड़ दिए जा चुके हैं।कोरोना संकट के बावजूद गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश का ऑल टाइम नंबर वन बनना कोई छोटी बात नहीं है जबकि कमलनाथ सरकार तो किसान फसल बीमा का प्रीमियम भी डकार गई थी। कांग्रेस को किसानों के मुद्दे पर बात करने का अधिकार नहीं है क्योंकि यह वह पार्टी है जिसकी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को वर्षों तक दबाकर रखा जबकि मोदी जी सरकार ने स्वामीनाथन की अधिकांश सिफारिशों को लागू कर 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की अपनी प्रतिबद्धता स्थापित की है। 

Post a Comment

0 Comments