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धर्म के रक्षार्थ धर्म गुरूओं और समस्त पीठों के शंकराचार्यों को करनी होगी अगुवाई उठाने होंगे ठोस कदम-श्रीधर शर्मा

 

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)

अनूपपुर (अंंचलधारा)जब-जब यह संसार सत्य की ओर से मुख फेरकर असत्य की दिशा में अग्रसर हुआ है,तब ऋषि मुनियों ने धर्म की विजय पताका फहराने हेतु शंखनाद किया है और आज इस संसार सागर को असत्य से बचाने के लिए पुनः ऐसे प्रयासों की आवश्यकता आन पड़ी है।
                       यह कहना है परम धर्म सांसद अमरकंटक श्रीधर शर्मा का।जिन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि आज हमारे देश में राजनीतिक दलों और संगठनों ने किस प्रकार से सनातन धर्म को हथियार बनाकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं और सनातन संस्कृति पर आघात पर आघात किए जा रहे हैं।श्री शर्मा ने बताया कि इस संसार सागर में सत्य को सदैव अपनी सत्यता का प्रमाण देने की आवश्यकता महसूस हुई और असत्य बरसाती नाले की भांति सीना चौड़ा कर समाज में असत्यता को स्थापित करने का प्रयास करते हुए अट्टहास करते नज़र आया लेकिन अंत में दुर्गति का शिकार हुआ और सत्य की विजय हुई।वर्तमान में सनातन धर्म का सामाजिक ह्रास देखने को मिल रहा है और इसके पीछे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सोंची समझी साजिश है।श्री शर्मा ने धर्म रक्षा के इस यज्ञ में सनातनी धर्म गुरुओं और समस्त पीठों के शंकराचार्यों का आह्वान करते हुए कहा कि असत्य विजय प्राप्त करने के लिए आदि काल का अनुसरण करते हुए इस संसार के कल्याणार्थ चार पीठों के शंकराचार्यों को धर्म गुरुओं को धर्म संस्थापकों के रुप में मोर्चा खोलना होगा और सनातन धर्म और संस्कृति को देश में ही नहीं अपितु समूचे संसार में स्थापित करने के लिए प्रयास करने होंगे।
                       सतयुग से लेकर त्रेता और द्वापर तक ऋषि मुनियों ने इस धरा को बुराइयों से बचाने के लिए अताताइयों के अत्याचार भी सहे और उनके सर्वनाश की नींव रखने का कार्य करते हुए धर्म की स्थापना और धर्म ध्वज फहराने की भी नींव स्थापित की और आज कलयुग में भी उस ऋषि परंपरा उसी तेजस्विता के साथ प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता है,जिससे कि इस जगत में अधर्म को हराकर धर्म के स्थापना की जड़ें मजबूत की जा सकें।श्री शर्मा ने राजनीतिक दलों और संगठनों की कुंठित मानसिकता पर भी प्रहार करते हुए कहा कि देश में कई तरह के प्रयोग टी वी चैनलों, कुछ तथाकथित हिंदू समर्थकों, कुछ स्वाधुओं और कई धर्म दरबारों के नाम पर आम जनता को गुमराह करने वालों के कारण सोशल मीडिया सहित कई नामी समाचार चैनलों पर भी सनातन संस्कृति को मज़ाक बनाने का कार्य जोरों पर चल रहा है, जो कि निंदनीय है।कभी किसी बॉलीवुड अभिनेता और अभिनेत्रियों के माध्यम से, कई फिल्मों के माध्यम से, तो कभी धर्म के नाम पर अपनी दुकान चलाने वालों को माध्यम बनाकर सनातन संस्कृति पर आघात करने के प्रयास किए गए, लेकिन सत्य को हराना मुश्किल है और अंत में सत्य की ही विजय होनी है लेकिन इसके लिए हमारे धर्म गुरुओं को कमान संभाल कर धर्म स्थापना की ओर अग्रसर होना चाहिए।वर्तमान राजनीतिक परिवेश में सनातन धर्म का मूल वर्ण व्यवस्था पर प्रहार किया जाना आज एक फैशन हो गया है, धर्म शास्त्रों पर पुनर्विचारण का वक्तव्य सनातन धर्म पर प्रहार है।इनका विरोध करना आवश्यक है।हिन्दू समाज केवल आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पीठों के आचार्यों से अपेक्षा कर रही है।हिन्दूओं द्वारा निर्मित प्राचीन मठ मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण हो चुका है। उन मंदिरों में पूजा अर्चना बंद हो चुके हैं।केवल प्राचीन धरोहर के रूप में ही कई देवालयों का उपयोग किया जा रहा है।धार्मिक मौलिकता सरकार ने समाप्त कर दिया है। सरकार के सामने वर्तमान मे मठ, मंदिरों,अखाड़ों,आश्रमों, की चल अचल संपत्तियों पर निगाह है और इन्हें कभी भी सरकार के द्वारा अधिग्रहण किया जा सकता है।मंदिरों में पुजारियों की नियुक्तियां सरकार द्वारा शास्त्रों के परंपरा के विपरीत किया जा रहा है।विदेशों में बसे हुए हिन्दुओं,उनके मंदिरों और स्थानों पर आक्रमण हो रहा है, इन सब बिंदुओं पर विचार किया जाना आवश्यक है।
          अधर्म के विरुद्ध आवाज बुलंद कर धर्म स्थापना के लिए समूचा हिंदू अपने धर्म आचार्यों की बाट जोह रहा है और इस पर जल्द ही शुरुआत किए जाने की आवश्यकता है,जिससे कि संसार का कल्याण हो सके।

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