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बिस्किट दिलाने के बहाने नाबालिग के साथ बलात्संग करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

 

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)

अनूपपुर (अंंचलधारा) न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कोतमा रवीन्‍द्र कुमार शर्मा के न्‍यायालय ने थाना रामनगर के अपराध की धारा 366क, 376(ए)(बी) भादवि 6 पॉक्‍सो अधिनियम में आरोपी सूरज चौधरी उम्र 32 वर्ष पिता स्‍व. मिठाई लाल चौधरी निवासी ग्राम खोंगापानी थाना झगराखांड जिला कोरिया (छ.ग.)को  भादवि की धारा 376एबी में आजीवन कारावास एवं 1 हजार रुपए का अर्थदण्‍ड एवं पॉक्‍सों की धारा 06 में आजीवन कारावास एवं 1 हजार रुपए के अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया।एवं धारा 366क में 07 वर्ष का कठोर कारावास एवं 500 रुपए का अर्थदण्‍ड।मामले में पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी,एजीपी राजगौरव तिवारी द्वारा की गयी है। 
                  सहा.जिला अभियोजन अधिकारी राजगौरव तिवारी द्वारा न्‍यायालयीन निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि घटना दिनांक 23/09/2019 के चार दिन पूर्व आरोपी पीडिता के घर आया था और रूका हुआ था,घटना दिनांक को अभियुक्‍त 11.00 बजे के लगभग पीडिता को बिस्‍किट दिलाने के लिए उसे साथ लेकर घर से निकला था,जब पीडिता एक घण्‍टे तक वापस नहीं आयी,तो पीडित की दादी उसे ढूंढने लगी,एक महिला ने बताया कि अभियुक्‍त चार-पांच साल उम्र की एक लडकी को लेकर आया था,तब अभियुक्‍त की भाभी ने कहा था कि लडकी को जहां से लेकर आये हो,वहां पहुंचाकर आओ,पीडित की दादी जब पीडित को ढूंढते हुए आ रही थी,तो राजनगर रेल्‍वे लाईन के पास पीडिता रोते हुए मिली,पूछने पर उसने बताया कि अभियुक्‍त ने उसे पटरी के किनारे जमीन में लिटा दिया था और उसकी पज्‍जी उतार कर गंदी हरकत कर रहा था।पीडिता के रोने पर अभियुक्‍त उसे छोडकर भाग गया था।  पीडिता की दादी ने घटना की रिपोर्ट थाना रामनगर में की,रामनगर पुलिस द्वारा अभियुक्‍त के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया,अभियुक्‍त को गिरफ्तार किया गया।  विवेचना पूर्ण होने के पश्‍चात अभियोग पत्र माननीय न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया।अभियोजन ने मामलें को प्रमाणित करने के लिए 19 साक्षी एवं 25 प्रदर्शेा को न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया।जहां न्‍यायालय द्वारा आरोपी को दोषी पाते हुए उपरोक्‍त दण्‍ड से दण्डित किया है।    
                     न्‍यायालय में राजगौरव तिवारी अपर लोक अभियोजक,एडीपीओ कोतमा द्वारा साक्ष्‍य व तर्क प्रस्‍तुत किये गये।तर्क के दौरान पीडिता के स्‍कर्ट में आरोपी का सीमन पाया गया जिसकी डीएनए द्वारा पुष्टि हुई के संबंध में तथ्‍य व तर्क प्रस्‍तुत किये गये जिससे संतुष्‍ट होकर न्‍यायालय ने उक्‍तानुसार दण्‍ड से दण्डित किया है।


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