(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में सत्तासीन हुई है जबसे रेलवे की मनमानी जबरदस्त बढ़ गई है।पहले कभी यात्री ट्रेनों को बंद नहीं किया जाता था, रेलवे की समय सारणी निश्चित समय में प्रकाशित होती थी, रेल बजट का लोगों को इंतजार रहता था जिसमें ट्रेनों की घोषणा होती थी।लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने यह सभी सिस्टम बदल कर अपनी मनमानी पर उतारू हो गए जिससे असंख्य रेल यात्रियों को बेवजह परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।उनकी स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह सड़क मार्ग से यात्रा कर सकें लेकिन देखा जा रहा है कि रेलवे काम कहीं करता है ट्रेन कहीं की बंद करता है और यही नहीं कार्य स्थल कुछ किलोमीटर की एरिया का होता है उसके पूर्व तक ट्रेनों को चलाकर यात्रियों को सुविधाएं दी जा सकती है लेकिन रेलवे ट्रेनों को प्रारंभिक स्टेशन से ही निरस्त कर चैन की नींद सोता है और वहीं दूसरी ओर रेलवे का कितना बड़ा भी काम चल रहा हो गुड्स ट्रेन बंद नहीं होती जो रेलवे की दोहरी मानसिकता को सामने लाता है।यही नहीं जब लोग अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं तो रेलवे द्वारा मुकदमा कायम कर लोगों में डर और भय पैदा करने का कार्य किया जाता है जो किसी भी मायने में उचित नहीं है।पूरी तरह से रेलवे अपनी मनमानी पर उतर आया है उसे यह नहीं मालूम कि जब जनता अपनी मनमानी पर उतर जाएगी एक साथ सभी स्टेशनों पर ट्रेनों के पहिए जाम कर दिए जाएंगे तो उस दिन रेलवे का क्या हाल होगा इस बात की रेलवे चिंता नहीं कर रही।रेलवे बोर्ड के अधिकारी दिल्ली में बैठकर ट्रेनों के स्टॉपेज घोषित करते हैं उन्हें यह पता नहीं कि छोटा स्टेशन क्या है और बड़ा स्टेशन क्या है।आज भी कई ट्रेन के बड़े बड़े स्टेशनों में स्टॉपेज नहीं है लेकिन छोटे-छोटे स्टेशनों पर उनके स्टॉपेज दिए गए हैं जो कहां का न्याय है।जिम्मेदारी रेलवे जोन एवं रेल मंडल की भी बनती है कि वह रेलवे बोर्ड को बताएं कि कौन से स्टॉपेज जरूरी है जो रेलवे बोर्ड ने घोषित नहीं किए हैं।
उसकी जानकारी देना रेलवे जोन एवं रेलवे मंडल का काम है लेकिन वह इस ओर भी ध्यान नहीं देती।आज देखा जा रहा है कि पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन (एनकेजे) सी केबिन पर एनकेजे सी केबिन व एनकेजे होम सिग्नल तक डबल लाइन को जोडने के लिए प्री एनआई व एनआई कार्य के कारण आगामी 18 दिनों (16 सितम्बर से 3 अक्टूबर 2022 तक बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन की 38 जोड़ी ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है,इसके अलावा 6 ट्रेनों को डायवर्ट रूट से चलाया जायेगा।
जबकि रेलवे बिलासपुर कटनी रूट में ट्रेन नंबर 11265/11266 जबलपुर अंबिकापुर जबलपुर एक्सप्रेस को चंदिया तक एवं ट्रेन नंबर 08747/08748 बिलासपुर कटनी बिलासपुर मेमू को भी चंदिया स्टेशन तक चलाया जा सकता है।लेकिन रेलवे इन ट्रेनों को भी बंद कर यात्रियों को बेवजह परेशान कर रहा है।इसके अलावा इंदौर से भोपाल से चलने वाली ट्रेनों को कटनी तक लाया जा सकता है लेकिन इन ट्रेनों को भी रेलवे द्वारा पूरी तरह से बंद कर दिया गया।यदि चंदिया तक रेलवे ट्रेनों की सुविधा दे दे तो लोग बस या टैक्सी के मार्फत कटनी स्टेशन पहुंचकर आगे की ट्रेन पकड़ सकते हैं लेकिन रेलवे इस तरह की सुविधा देने की बात अपने मन में भी नहीं लाता उसे पूरी तरह से आराम चाहिए इसलिए वह ट्रेनों को प्रारंभिक स्टेशन से ही बंद कर देता है।जिससे कुछ दिन चैन की नींद सो सके।अब जरूरत है इस भारतवर्ष की जनता को सोचने के लिए कि क्या भाजपा की सरकार अच्छी है या पूर्व की कांग्रेस सरकार।कांग्रेस सरकार में कभी भी यात्रियों के साथ छलावा नहीं किया उस समय भी गुड्स ट्रेन चलती थी लेकिन यात्री ट्रेनें बंद नहीं होती थी।लेकिन भाजपा की सरकार ने कांग्रेश के सभी नियमों को बदल कर अपने मनमानी नियम प्रारंभ कर दिए इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पड़ेगा।क्योंकि जनता पूरे भारत की त्रस्त हो चुकी है रेलवे द्वारा कई ट्रेनों का संचालन अभी तक प्रारंभ नहीं किया गया है जो लगभग 3 वर्षों से बंद पड़ी हुई हैं यही नहीं पैसेंजर एवं मेमू ट्रेन को भी स्पेशल बनाकर यात्रियों का जबरदस्त शोषण किया जा रहा है।अधिकांश ट्रेनों के स्टॉपेज मनमानी तरीके से बंद कर दिए गए और जहां पर अच्छा दबाव पड़ता है राजनीतिक प्रेशर पड़ता है वहां के स्टॉपेज भी बहाल हो जाते हैं,ट्रेनें भी बहाल हो जाती हैं।सामने दुनिया भर के त्योहारों का मौसम आ चुका है लेकिन रेलवे को इन त्योहारों से भी कोई लेना देना नहीं।
निश्चित ही यात्रियों को त्यौहार के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।काफी समय से रेलवे ट्रेनों को किसी ना किसी बहाने बंद कर कोयला गाड़ियों को पूरी तरह से फ्री हैंड दे रही है।यात्री ट्रेन जरूर बंद हो जाएंगी लेकिन कोयला गाड़ी धड़धड़ाते हुए कटनी-बिलासपुर रूट पर दौड़ेगी।जिसका रेल यात्रियों को पुरजोर विरोध करना चाहिए और एक भी कोयला गाड़ी को बिलासपुर-कटनी रूट में प्रवेश नहीं देना चाहिए।जब रेलवे को उसकी औकात का एहसास होगा जो आए दिन यात्रियों से खिलवाड़ करने में बाज नहीं आ रहा।
उसकी जानकारी देना रेलवे जोन एवं रेलवे मंडल का काम है लेकिन वह इस ओर भी ध्यान नहीं देती।आज देखा जा रहा है कि पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल अंतर्गत न्यू कटनी जंक्शन (एनकेजे) सी केबिन पर एनकेजे सी केबिन व एनकेजे होम सिग्नल तक डबल लाइन को जोडने के लिए प्री एनआई व एनआई कार्य के कारण आगामी 18 दिनों (16 सितम्बर से 3 अक्टूबर 2022 तक बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन की 38 जोड़ी ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है,इसके अलावा 6 ट्रेनों को डायवर्ट रूट से चलाया जायेगा।
जबकि रेलवे बिलासपुर कटनी रूट में ट्रेन नंबर 11265/11266 जबलपुर अंबिकापुर जबलपुर एक्सप्रेस को चंदिया तक एवं ट्रेन नंबर 08747/08748 बिलासपुर कटनी बिलासपुर मेमू को भी चंदिया स्टेशन तक चलाया जा सकता है।लेकिन रेलवे इन ट्रेनों को भी बंद कर यात्रियों को बेवजह परेशान कर रहा है।इसके अलावा इंदौर से भोपाल से चलने वाली ट्रेनों को कटनी तक लाया जा सकता है लेकिन इन ट्रेनों को भी रेलवे द्वारा पूरी तरह से बंद कर दिया गया।यदि चंदिया तक रेलवे ट्रेनों की सुविधा दे दे तो लोग बस या टैक्सी के मार्फत कटनी स्टेशन पहुंचकर आगे की ट्रेन पकड़ सकते हैं लेकिन रेलवे इस तरह की सुविधा देने की बात अपने मन में भी नहीं लाता उसे पूरी तरह से आराम चाहिए इसलिए वह ट्रेनों को प्रारंभिक स्टेशन से ही बंद कर देता है।जिससे कुछ दिन चैन की नींद सो सके।अब जरूरत है इस भारतवर्ष की जनता को सोचने के लिए कि क्या भाजपा की सरकार अच्छी है या पूर्व की कांग्रेस सरकार।कांग्रेस सरकार में कभी भी यात्रियों के साथ छलावा नहीं किया उस समय भी गुड्स ट्रेन चलती थी लेकिन यात्री ट्रेनें बंद नहीं होती थी।लेकिन भाजपा की सरकार ने कांग्रेश के सभी नियमों को बदल कर अपने मनमानी नियम प्रारंभ कर दिए इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पड़ेगा।क्योंकि जनता पूरे भारत की त्रस्त हो चुकी है रेलवे द्वारा कई ट्रेनों का संचालन अभी तक प्रारंभ नहीं किया गया है जो लगभग 3 वर्षों से बंद पड़ी हुई हैं यही नहीं पैसेंजर एवं मेमू ट्रेन को भी स्पेशल बनाकर यात्रियों का जबरदस्त शोषण किया जा रहा है।अधिकांश ट्रेनों के स्टॉपेज मनमानी तरीके से बंद कर दिए गए और जहां पर अच्छा दबाव पड़ता है राजनीतिक प्रेशर पड़ता है वहां के स्टॉपेज भी बहाल हो जाते हैं,ट्रेनें भी बहाल हो जाती हैं।सामने दुनिया भर के त्योहारों का मौसम आ चुका है लेकिन रेलवे को इन त्योहारों से भी कोई लेना देना नहीं।
निश्चित ही यात्रियों को त्यौहार के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।काफी समय से रेलवे ट्रेनों को किसी ना किसी बहाने बंद कर कोयला गाड़ियों को पूरी तरह से फ्री हैंड दे रही है।यात्री ट्रेन जरूर बंद हो जाएंगी लेकिन कोयला गाड़ी धड़धड़ाते हुए कटनी-बिलासपुर रूट पर दौड़ेगी।जिसका रेल यात्रियों को पुरजोर विरोध करना चाहिए और एक भी कोयला गाड़ी को बिलासपुर-कटनी रूट में प्रवेश नहीं देना चाहिए।जब रेलवे को उसकी औकात का एहसास होगा जो आए दिन यात्रियों से खिलवाड़ करने में बाज नहीं आ रहा।

0 Comments