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डॉ.नितिन सहारिया ने कहा कि महर्षि अरविंद भारत के राष्ट्रवादी,क्रांतिकारी,आध्यात्मिक संत थे

 

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो) 

अनूपपुर (अंंचलधारा) महर्षि अरविंद भारत के राष्ट्रवादी, क्रांतिकारी, आध्यात्मिक संत थे। भारत वर्ष का इतिहास अत्यंत गौरवमयी रहा है। यह अनंत, करोड़ों वर्ष प्राचीन है। सनातन है, हिन्दुत्व मय है, जिस पर हमें, प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। पिछले पांच हजार वर्ष में सैकड़ों संत, तपस्वी हुए हैं। कबीर, तुलसीदास, कंबन, रामदास, तुकाराम, परमहंस, विवेकानन्द, गुरुनानक, अरविन्द जैसे संत हुए हैं। ये मार्गदर्शक व आध्यात्मिक शक्ति के केन्द्र हैं। 88 हजार ऋषियों की संसद हिमालय में हैं, महर्षि अरविन्द उनमें से एक हैं। उक्ताषय के विचार शासकीय महाविद्यालय बिजुरी के सहायक प्राध्यापक डॉ. नितिन सहारिया ने कलेक्ट्रेट स्थित सोन सभागार में 8 सितम्बर गुरूवार को जन अभियान परिषद के सौजन्य से महर्षि श्री अरविन्द जी की 150 वीं जन्म जयंती सार्धशती कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर कलेक्टर सरोधन सिंह थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामलाल रौतेल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार मनोज द्विवेदी, समाजसेवी रश्मि खरे उपस्थित थीं। इस अवसर पर जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक,प्रशासनिक अधिकारी, विकास खण्ड समन्वयक फत्ते सिंह सहित नगर के प्रबुद्धजन, अधिवक्ता, परामर्शदाता, स्वयंसेवी संगठन प्रतिनिधि, नवांकुर समिति सदस्य, प्रस्फुटन समिति सदस्य, पत्रकार, सी एम सी एल डी पी छात्र आदि उपस्थित थे।  
                इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. नितिन सहारिया ने कहा कि इस वर्ष महर्षि श्री अरविंद के 150 वें जन्मवर्ष, सार्धशती पर कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं । लोगों के बीच महर्षि अरविंद की प्रतिभा, स्वाधीनता में उनके योगदान को प्रचारित किया जा रहा है । महर्षि श्री अरविंद एक महान योगी एवं दार्शनिक के साथ - साथ प्रमुख क्रांतिकारी और एक महान कवि भी थे । इन्होंने युवा अवस्था में स्वतन्त्रता संग्राम में क्रान्तिकारी के रूप में भाग लिया , किन्तु बाद में वे एक योगी बन गये। महर्षि श्री अरविंद का जन्म कलकत्ता के एक सम्पन्न परिवार में 15 अगस्त 1872 को हुआ था । महर्षि श्री अरविंद को भारतीय एवं यूरोपीय दर्शन और संस्कृति का अच्छा ज्ञान था। यही कारण है कि उन्होंने इन दोनों के समन्वय की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किया । कुछ लोग उन्हें भारत की ऋषि परम्परा की नवीन कड़ी मानते हैं। महर्षि श्री अरविंद का दावा था कि इस युग में भारत विष्व में एक रचनात्मक भूमिका निभा रहा है तथा भविष्य में भी निभायेगा। उनके दर्शन में जीवन के सभी पहलुओं का समावेश मिलता है। उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त किए हैं। जैसे संस्कृति, राष्ट्रवाद, राजनीति, समाजवाद आदि साहित्य, विशेषकर काव्य के क्षेत्र में उनकी कृतियां बहुचर्चित हुई हैं। इनकी रचना का वर्णन विष्व भर में प्रख्यात है। 07 साल की आयु से ही विदेश में शिक्षा प्राप्त करने वाले श्री अरविंद का वर्णन प्रचंड विद्वानों में होता है । श्री अरविंद ने युवा अवस्था में ही स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लिया। बंगाल के महान क्रांतिकारियों में से एक महर्षि  अरविन्द देश की आध्यात्मिक क्रांति की पहली चिंगारी थे। उन्हीं के आह्वान पर हजारों बंगाली युवकों ने देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदों को चूम लिया था। सशस्त्र क्रांति के पीछे उनकी ही प्रेरणा थी। पूरे विष्व में उनके दर्शनशास्त्र का बहुत गहरा प्रभाव रहा है और उनकी साधना पद्धति के अनुयायी सब देशों में हैं। वे कवि भी थे और गुरु भी। अन्तर्जगत में महर्षि श्री अरविन्द आत्मवान थे। आत्मा को समाहित कर वे आत्मवान बने। उनका मानना था कि जो आत्मवान होता है, वही दूसरों का हृदय छू सकता है। उन्होंने जन-जन का मानस छुआ। प्रसन्न मन, सहज ऋजुता, सबके प्रति समभाव, आत्मीयता की तीव्र अनुभूति, राष्ट्रीयता एवं हिन्दुत्व का दर्शन, विशाल चिंतन, जातीय, प्रांतीय, साम्प्रदायिक और भाषाई विवादों से मुक्त यह था उनका महान व्यक्तित्व, जो अदृश्य होकर भी समय-समय पर दृश्य बनता रहा। उन्होंने धर्म के शाश्वत सत्यों से युग को प्रभावित किया, इसलिए वे युगधर्म के व्याख्याता बन गए। उन्होंने नैतिक क्रांति एवं स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया, इसलिए वे युगपुरुष और क्रांतिकारी कहलाए। वे संघर्षों की दीवारों को तोड़-तोड़ कर आगे बढ़े, इसलिए वे प्रगतिशील थे। सब वर्ग के लोगों ने उन्हें सुना, समझने का यत्न किया। वे सबके होकर ही सबके पास पहुंचे इसलिए वे विशाल दृष्टि थे। 
        कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व विधायक रामलाल रौतेल ने कहा कि महर्षि अरविन्द की शिक्षा और उनके जीवन को हमें अपने दैनिक जीवन साधना में ढालना होगा। कार्यक्रम के दौरान परामर्शदाता श्री मुकेश गौतम द्वारा योगी श्री अरविंद द्वारा रचित दुर्गा स्त्रोत का पाठ किया गया तथा मो. नजीर खान द्वारा महर्षि श्री अरविंद के जीवन व्रत का वाचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में वंदेमातरम् गान का सामूहिक गायन किया गया।

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