(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के राजेन्द्रग्राम में विधुत विभाग की मनमानी से जनजीवन,व्यापारी सभी त्रस्त हैं।बताया जाता है कि आए दिन बगैर सूचना के विद्युत सप्लाई बंद कर दी जाती है जिसके कारण आम उभोक्ताओ को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगो का जन जीवन अस्त ब्यस्त हो गया है बिभाग की मनमानी हठधर्मिता के कारण अघोषित बिजली कटौती कर देते है जिसका खामियाजा आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। आये दिन दो से चार घंटे कभी कभी तो दस दस घंटे तक की बिजली गुल रहती है। सबसे बुरा हाल ग्रामीण फीडर का है। बिजली गायब रहने से कई काम काज ठप पड़े हैं।ग्रामीणों के अनुसार बिजली सप्लाई बिना कोई सूचना के ही कटौती की जा रही है। बिजली की सप्लाई न मिलने से ग्रामीण व बिजली उपभोक्ता दोनों ही परेशान है।
रोस्टर के तहत विद्युत व्यवस्था उपलब्धता सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होती है स्पष्ट निर्देश है की यदि क्षेत्र से विद्युत की शिकायते आ रही है तो उसे अनदेखा न करें त्वरित निराकरण करे यदि कहीं भी लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
वर्तमान समय में विद्युत आपूर्ति के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्या रोस्टर है यह किसी को पता नहीं है। बिजली कब आएगी कब जाएगी इसके लिए निर्धारित कोई समय नहीं है बिजली अपने पुराने ढर्रे पर एक बार फिर पहुंच चुकी है।
चचाई फाल्ट का बहाना कर
घंटो रोक दी जाती है सप्लाई
चचाई से पुष्पराजगढ़ में आ रही बिधुत सप्लाई का विगत दो वर्षों से कोई मेंटिनेंस कार्य नही कराया गया जिसके कारण आये दिन विद्युत सप्लाई बाधित हो रही है।विभाग की लापरवाही के कारण इसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।पुष्पराजगढ़ मुख्यालय में विगत एक वर्ष से सहायक अभियंता का पद रिक्त है कनिष्ठ अभियंता के पद पर जब से रामकिशोर गुप्ता पदस्थ हुये है आये दिन चचाई फाल्ट का बहाना कर कई कई घंटों बिधुत सप्लाई बंद कर दी जाती है और शासकीय नंबर को स्विच ऑफ कर अपने घर पर आराम फरमा रहे होते है।यहां तक की उपभोक्ताओं को कोई समुचित जानकारी भी नहीं मिल पाती है की बिजली कब आएगी।बीते एक वर्ष से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
आजादी के 75 वर्ष बाद
भी कई गांव विद्युत विहीन
पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में आज भी कई सुदूर गांव ऐसे है जो आजादी के 75 वर्ष बाद भी विद्युत विहीन है।कुछ गांवो में सौभाग्य योजना के तहत विगत 3-4 वर्षे पूर्व संबंधित ठेकेदारों से कार्य कराया गया था जो उन्होंने आधे अधूरे कार्य कराकर छोड़ दिया गया जहाँ विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है।बिजली के पोल और तार तो गांव तक गये है परंतु उसमे करंट ही नहीं है।इसके बाबजूद विभाग में बैठे कर्मचारी अधिकारी भोले भाले आदिवासी गरीब मजदूरों के नाम हर माह बिजली का बिल थमाया जा रहा है और उन्हें कर्जदार बनाकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

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