(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) जीना मरना सब ऊपर वाले के हाथ में है ऐसा लोगों का कहना है मगर विज्ञान इस बात से परहेज करता आया है। लगातार मौत से खत्म हो रही जिंदगी और उससे जूझ रहा परिवार इस घटना को कभी भूल भी नहीं पाता है। साइंस इन सभी बातों पर अमल करता आया है कि आखिर किन कारणों से लोग आत्मा हत्या कर रहे है। विश्व स्वस्थ संगठन भी मानता है की हर साल लाखों लोग मौत को गले लगा रहे है। इसी सब विषय पर आज जिला चिकित्सालय के स्व सहायता भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया।इस दौरान जिला अस्पताल के डॉक्टर समेत नर्सिंग स्टॉफ मौजूद रहा। इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुचाई जाए। जिससे मौत के मुहाने में जाने वाले लोगों को आत्माहत्या करने से रोका जा सकें।
अयोजित हुए इस कार्यक्रम में खास तौर पर मनोसामाजिक कारण बताया गया है।जिसमें व्यक्तिगत विकास की समस्या का प्रमुख कारण है।तनाव, अकेलापन, पारिवारिक क्लेश,सहयोग न मिलना, बेरोजगारी, व्यापार, उधारी जैसी समस्या प्रमुख है।
जिसमे कई मामले ला ईलाज बीमारी से जुड़े होते है। वही कुछ मामले नशे से भी उत्पन होते है।जिसके चलते आदमी आत्महत्या करता है।सम्पन हुए विश्व आत्माहत्या रोकथाम दिवस पर इस तरह से घिरे लोगों को बातचीत कर उनके अकेलेपन को दूर करें उनसे उस विषय में बात करें। बार बार आत्माहत्या की बात करने वाले व्यक्ति के आस पास मौजूद वो चीज़े जिनसे इनको नुकसान हो सकता है उसको वहा से हटा दे।खास तौर पर स्कूल लाईफ में ये प्रॉब्लम ज्यादा हो रही है। जिसके लिए परिजनों को अपने बच्चों से बराबर मेल जोल करते रहना चाहिए।अपनी जीवन लीला समाप्त करने की बात करने वाले व्यक्ति से ये बात भी जरूरी है कि आपके जीवन में उनकी जरूरत ज्यादा है। सबसे मुख्य बात ये भी कार्यक्रम में बताई की एक दूसरे सुने और सुनाए और आत्म हत्या की सोच को दूर भगाने का प्रयास भी करने की बात कार्यक्रम के माध्यम से बताई गई
है।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुरेश चंद राय, सिविल सर्जन डॉक्टर धनीराम सिंह, डॉक्टर एस.आर.पी. द्विवेदी, डॉ.अलका तिवारी,वीएमओ डॉक्टर प्रवीण उर्मालिया,डॉक्टर जनक सारीवान,डीपीएम सुनील नेमा समेत स्टॉफ नर्स मौजूद रही।वही प्रभा सिंह राठौर के द्वारा कार्यक्रम का अयोजन किया गया।
अयोजित हुए इस कार्यक्रम में खास तौर पर मनोसामाजिक कारण बताया गया है।जिसमें व्यक्तिगत विकास की समस्या का प्रमुख कारण है।तनाव, अकेलापन, पारिवारिक क्लेश,सहयोग न मिलना, बेरोजगारी, व्यापार, उधारी जैसी समस्या प्रमुख है।
जिसमे कई मामले ला ईलाज बीमारी से जुड़े होते है। वही कुछ मामले नशे से भी उत्पन होते है।जिसके चलते आदमी आत्महत्या करता है।सम्पन हुए विश्व आत्माहत्या रोकथाम दिवस पर इस तरह से घिरे लोगों को बातचीत कर उनके अकेलेपन को दूर करें उनसे उस विषय में बात करें। बार बार आत्माहत्या की बात करने वाले व्यक्ति के आस पास मौजूद वो चीज़े जिनसे इनको नुकसान हो सकता है उसको वहा से हटा दे।खास तौर पर स्कूल लाईफ में ये प्रॉब्लम ज्यादा हो रही है। जिसके लिए परिजनों को अपने बच्चों से बराबर मेल जोल करते रहना चाहिए।अपनी जीवन लीला समाप्त करने की बात करने वाले व्यक्ति से ये बात भी जरूरी है कि आपके जीवन में उनकी जरूरत ज्यादा है। सबसे मुख्य बात ये भी कार्यक्रम में बताई की एक दूसरे सुने और सुनाए और आत्म हत्या की सोच को दूर भगाने का प्रयास भी करने की बात कार्यक्रम के माध्यम से बताई गई
है।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुरेश चंद राय, सिविल सर्जन डॉक्टर धनीराम सिंह, डॉक्टर एस.आर.पी. द्विवेदी, डॉ.अलका तिवारी,वीएमओ डॉक्टर प्रवीण उर्मालिया,डॉक्टर जनक सारीवान,डीपीएम सुनील नेमा समेत स्टॉफ नर्स मौजूद रही।वही प्रभा सिंह राठौर के द्वारा कार्यक्रम का अयोजन किया गया।

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