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सावन के पवित्र मास में मां नर्मदा की पावन भूमि अमरकंटक की छवि हो जाती है निराली-श्रीधर शर्मा

 

(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)

अनूपपुर (अंंचलधारा) जिले की पवित्र नगरी अमरकंटक में सावन माह के शुभारंभ होते ही भक्तों का आवागमन प्रारंभ हो चुका है और भक्तों का उत्साह दर्शनीय है।सावन मास के दस्तक देते ही चारों ओर का वातावरण एक अलग शोभा बिखेरते हुए रमणीयता बिखेर रहा है। मां नर्मदा की पावन भूमि अमरकंटक में शिव भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ माँ नर्मदा और शिव जी के दर्शन के लिए भारी संख्या में आ रहे हैं और अपने आराध्य देव श्री शिव के दर्शन कर माँ नर्मदा के पवित्र व शीतल जल की शीतलता से भगवान शिव का अभिषेक कर स्वयं को कृतार्थ कर रहे हैं। पूरे अमरकंटक में चारों ओर भक्तों के आवागमन, दुकानों के सजने, माँ नर्मदा के दरबार में नर्मदा आरती होने और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के संपन्न होने के कारण अमरकंटक की शोभा अविस्मरणीय और अलौकिक प्रतीत होती है।
                 परम् धर्म सांसद व मध्यप्रदेश कॉंग्रेस कमेटी के सचिव श्रीधर शर्मा से हुई  खास बातचीत के दौरान मिली जानकारी के अनुसार ऐसी धारणा है कि सावन मास के किसी एक सोमवार में मां नर्मदा स्वयं शिव जी के अभिषेक के लिए आती हैं और यह स्थान पातालश्कर के नाम से जाना जाता है और शिव जी के उस मंदिर में पूरे एक दिन के लिए पानी का स्तर बढ़ जाता है और शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है। इस सुंदर घटना के अलौकिक दृश्य के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन धन्य हो जाता है।
                     श्री शर्मा ने बताया की लंबे इंतजार के बाद अमरकंटक के निवासियों को श्रावण मास के आगमन पर रोजगार के रूप में सौगात मिलने की आशा जगी है, जिससे लोगों के मन प्रफुल्लित और हर्षित होकर अमरकंटक की शोभा में चार चांद लगा रहे हैं। सावन में वर्षा की बूंदों से सिंचित होकर अमरकंटक की वनस्पतियों में एक अलग सा निखार दिखाई देता है, जो कि लोगों के मन को अलौकिक शांति प्रदान करता है। अमरकंटक का नाम समूचे भारतवर्ष में एक प्रसिद्ध दैविक स्थल के साथ साथ एक पर्यटन स्थल के रूप में बड़े सम्मान से लिया जाता है और मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की सीमा को जोड़ने वाला यह तीर्थ दोनों राज्यों के सामंजस्य से आने वाले समय में एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है और इसके लिए दोनों राज्यों की सरकारें निरंतर प्रयास कर रही हैं।

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