नई शिक्षा नीति,पत्रकारिता
शिक्षा के विशेष व्याख्यान में उदगार
(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)अनूपपुर (अंंचलधारा) तथ्य,तर्क,संदर्भ वह मानक हैं जो पत्रकारिता को गुणवत्तापूर्ण बनाते हैं।नीति निर्माण में उपयोगिता और उपादेयता भी सार्थक पत्रकारिता हेतु आवश्यक मानक हैं।
उक्त उदगार अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी जी ने अभिव्यक्त किए। उन्होने पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से आयोजित 'नई शिक्षा नीति एवं पत्रकारिता शिक्षा' विषयक विशेष व्याख्यान में आगे कहा कि सत्यबोध, सत्याश्रय, सत्य की खोज नई शिक्षा नीति के लक्ष्य हैं और पत्रकारिता के भी यही लक्ष्य हैं।पत्रकारिता व्यक्ति केंद्रित नहीं,समाज केंद्रित होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना है,पत्रकारिता शिक्षा में राष्ट्रबोध,समयबोध तथा दायित्वबोध का समावेश करना चाहिए।नई शिक्षा नीति समर्थ तथा विश्व नागरिक बनाने का साधन है।पत्रकारिता शिक्षा के माध्यम से इसका बोध विकसित किया जा सकता है।सोशल मीडिया का नाम यदि सोशल है तो उसका काम भी सोशल होना चाहिए। लोकनीति, शासननीति और साधुनीति का पालन हमारी परम्परा है और यही पत्रकारिता का संकल्प और पत्रकारिता शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।
मुख्य वक्ता एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता के मर्म को समझना आवश्यक है। पत्रकार को पहले खुद सीखना होगा तभी वह दूसरों का मार्गदर्शन कर सकेगा। भारतीय मीडिया बिना सामाजिकता और भारतबोध के कोई मायने नहीं रखता।लोककल्याण और जनजागरण भारतीय पत्रकारिता का मूल उद्देश्य है। उन्होने आगे कहा कि पत्रकारिता शिक्षा मूल्यों एवं भारतीयता का वाहक बने। भारतबोध, लोककल्याण को आधार बनाकर चलने वाली पत्रकारिता का विकास नई शिक्षा नीति के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
इस अवसर पर केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के वरिष्ठ आचार्य एवं प्रख्यात भाषाविद प्रोफेसर उमापति दीक्षित ने विषय को नया आयाम देते हुए सस्वर शिव तांडव भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर पी. के. शामल, प्रो.नागाराजू, डा. शिव कुमार मिश्रा, डा. गोविंद मिश्र, डा.के.एम. सिंह, डा. नागेन्द्र सिंह, सुश्री अभिलाषा, डा. कृष्णामूर्ति, डा. वासू चौधरी, डा. पूनम पाण्डेय, सुश्री कीर्ति, डा. हरेराम पांडेय, विनोद वर्मा, हरीशचंद्र विश्वकर्मा, डा. कमलेश पांडेय, डा. सन्तोष द्विवेदी, श्रीधर पांडेय, प्रवीण परतेती, आकाश द्विवेदी सहित शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों आदि ने भाग लिया। कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हेड डा. नरेन्द्र त्रिपाठी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।अतिथियों का स्वागत प्रो. मनीषा शर्मा और संचालन प्रो. राघवेंद्र मिश्रा ने किया।
उक्त उदगार अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी जी ने अभिव्यक्त किए। उन्होने पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से आयोजित 'नई शिक्षा नीति एवं पत्रकारिता शिक्षा' विषयक विशेष व्याख्यान में आगे कहा कि सत्यबोध, सत्याश्रय, सत्य की खोज नई शिक्षा नीति के लक्ष्य हैं और पत्रकारिता के भी यही लक्ष्य हैं।पत्रकारिता व्यक्ति केंद्रित नहीं,समाज केंद्रित होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना है,पत्रकारिता शिक्षा में राष्ट्रबोध,समयबोध तथा दायित्वबोध का समावेश करना चाहिए।नई शिक्षा नीति समर्थ तथा विश्व नागरिक बनाने का साधन है।पत्रकारिता शिक्षा के माध्यम से इसका बोध विकसित किया जा सकता है।सोशल मीडिया का नाम यदि सोशल है तो उसका काम भी सोशल होना चाहिए। लोकनीति, शासननीति और साधुनीति का पालन हमारी परम्परा है और यही पत्रकारिता का संकल्प और पत्रकारिता शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।
मुख्य वक्ता एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता के मर्म को समझना आवश्यक है। पत्रकार को पहले खुद सीखना होगा तभी वह दूसरों का मार्गदर्शन कर सकेगा। भारतीय मीडिया बिना सामाजिकता और भारतबोध के कोई मायने नहीं रखता।लोककल्याण और जनजागरण भारतीय पत्रकारिता का मूल उद्देश्य है। उन्होने आगे कहा कि पत्रकारिता शिक्षा मूल्यों एवं भारतीयता का वाहक बने। भारतबोध, लोककल्याण को आधार बनाकर चलने वाली पत्रकारिता का विकास नई शिक्षा नीति के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
इस अवसर पर केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के वरिष्ठ आचार्य एवं प्रख्यात भाषाविद प्रोफेसर उमापति दीक्षित ने विषय को नया आयाम देते हुए सस्वर शिव तांडव भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर पी. के. शामल, प्रो.नागाराजू, डा. शिव कुमार मिश्रा, डा. गोविंद मिश्र, डा.के.एम. सिंह, डा. नागेन्द्र सिंह, सुश्री अभिलाषा, डा. कृष्णामूर्ति, डा. वासू चौधरी, डा. पूनम पाण्डेय, सुश्री कीर्ति, डा. हरेराम पांडेय, विनोद वर्मा, हरीशचंद्र विश्वकर्मा, डा. कमलेश पांडेय, डा. सन्तोष द्विवेदी, श्रीधर पांडेय, प्रवीण परतेती, आकाश द्विवेदी सहित शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों आदि ने भाग लिया। कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हेड डा. नरेन्द्र त्रिपाठी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।अतिथियों का स्वागत प्रो. मनीषा शर्मा और संचालन प्रो. राघवेंद्र मिश्रा ने किया।

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