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जंगल बन रहे खेत जिम्मेदार बेसुध वन एवं वन्य जीवो पर पड़ रहा दुष्प्रभाव जिम्मेदार रहते हैं नदारद

 
(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंचलधारा) पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन जहां एक वैश्विक समस्या के रूप में उभर कर आई है इसमें भारत सहित विश्व के सभी देश चिंतित हैं एवं आगामी कार्य योजना बनाने के लिए को 26 जैसे बैठकों का खास आयोजन किया जा रहा है इन चुनौतियों से निपटने के लिए वन संरक्षण तथा वृहद स्तर पर वृक्षारोपण एक सफल विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।भारत के ह्रदय स्थली मध्यप्रदेश में एक बड़ा भूभाग वनों से आच्छादित है प्रदेश का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा वन भूमि है किंतु लगातार वनों की कटाई से यह विभाग कम होते जा रहा है पेड़ों की कटाई तथा बाजारीकरण के साथ ही क्षेत्रीय लोगों द्वारा जंगलों को काटकर खेत बनाए जा रहे हैं तथा रहवासी इलाका निर्मित किए जा रहे हैं जिसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव वन एवं वन्य जीवो पर पड़ा है सरकारी उदासीनता एवं भ्रष्ट आचरण ने इसे खूब बढ़ावा दिया है। जिले के अमरकंटक वन परिक्षेत्र विभिन्न चुनौतियों का सामना वर्ष भर करता रहता है जिसमें भूस्खलन जंगल में आग लगना अतिक्रमण उत्खनन एवं वनों की अंधाधुंध कटाई शामिल है राजनीतिक कारणों से ना तो जनप्रतिनिधि और ना ही जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई कार्यवाही करते हैं जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं। 

वन अधिकार पट्टा की 
लालच में जंगलों की कटाई

शासन द्वारा वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन परीक्षेत्र भूमि पर निवासरत या खेती कर रहे जनजाति समुदाय को वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाता है जो प्रथम दृष्टया में सामाजिक उन्नति के रूप में दृष्टिगोचर होती हैं।किंतु जमीनी स्तर पर इसके दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं कई क्षेत्रों में क्षेत्रीय ग्रामीण एवं जनजाति समुदाय इसका नकारात्मक फायदा उठा रही हैं।वह गांव से लगे जंगलों को काट कर लगातार खेत बना रहे हैं जिसमें साल सगुन महुआ चिरौंजी आंवला इत्यादि के पेड़ों की कटाई कर उन्हें समतल भूमि के रूप में निर्मित किया जा रहा है। ग्रामीणों को इस बात का पूर्ण विश्वास है कि हम जितना जंगल काटेंगे 1 दिन शासन ऑन हैं उस भूमि का पट्टा अवश्य दे देगी, इसी तरह ग्रामीणों के हौसले बुलंद हैं और जंगलों की लगातार कटाई होती जा रही है। 

जिम्मेदार
अधिकारी नदारद

वनों की रक्षा के लिए जिम्मेदार के रूप में वनरक्षक की नियुक्ति शासन द्वारा की जाती हैं साथी वन रक्षा समिति का निर्माण किया जाता है विकासखंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक पर विभिन्न पदों पर वन अधिकारी वनों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं किंतु बदलते समय के साथ अधिकारियों ने अपना कार्य क्षेत्र वनों से परिवर्तित कर कार्यालय तक सीमित कर रखा है ना तो क्षेत्रीय भ्रमण किया जा रहा है और ना ही पेड़ों की कटाई कर रहे ग्रामीणों को रोकने के लिए कोई प्रयास किए जा रहे हैं। 

इन क्षेत्रों में 
गंभीर मामले

अमरकंटक वन परिक्षेत्र के विभिन्न गांव जिनमें बिजोरी, भरनी, ताली, भूंडाकोना उमरगुहान, दमगढ़, फर्रीसेमर आदि शामिल हैं क्षेत्रों में वनों की कटाई एवं खेतिहर भूमि का निर्माण बहुत ही चिंता जनक है बीट सुरक्षाकर्मी ना तो ग्रामीणों के साथ संवाद करते हैं और ना ही वनों की कटाई हेतु कोई प्रयास कर रहे हैं।

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