Anchadhara

अंचलधारा
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कोरोना से जीतकर लौटे फिर दुगुनी ऊर्जा से लगे हुए हैं अनवरत जनसेवा में डॉ.एससी.राय डॉ.एसआरपी. द्विवेदी का जवाब नहीं

 

 धरती पर साक्षात
 भगवान का रूप है डॉक्टर
        (हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)                  
अनूपपुर (अंचलधारा)डॉक्टर को हमेशा से भगवान का दूसरा रूप माना गया है।धरती पर साक्षात भगवान का रूप डॉक्टर ही है जो हमेशा अपना कर्तव्य बहुत अच्छे से निभाता है।दिन हो रात हो डॉक्टर हमेशा अपने फर्ज़ को पूरा करता है अपनी पूरी कोशिश लगाता है मरीज़ को बचाने के लिए।डॉक्टर सबके जीवन में सबके लिए महत्वपूर्ण व्यक्ति है। वह सुबह जल्दी उठता है वह दिन रात काम करता है। एक डॉक्टर जानता है कि बीमार लोगों का इलाज और इलाज कैसे किया जाता है। एक डॉक्टर बीमार का बहुत अच्छा दोस्त है। वह हमेशा विनम्रता से बात करता है ताकि मरीज सहज महसूस करें।वह कभी चिढ़ता नहीं है और बीमारों के लिए पूरी कोशिश करता है। एक डॉक्टर का जीवन कठिन होता है।उसके पास सोने और आराम करने के लिए ज्यादा समय नहीं है। एक डॉक्टर बीमारी और मौत से लड़ता है।वह कई लोगों की जान बचाता है। वह अपने मरीजों से धीरे से बात करता है वह हमेशा बीमार रोगियों की सेवा के लिए तैयार रहता है जब भी जरूरत होगी दिन हो या रात। एक डॉक्टर के रूप में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जिसे मेरे देश के लोगों की सेवा करने का पवित्र कर्तव्य और जिम्मेदारी निभानी है।एक गरीब मरीज डॉक्टर की फीस या यहां तक ​​कि दवाइयों का खर्च नहीं उठा सकता है तो वह फ़्री मे दवा करता है।एक डॉक्टर रोगियों के लिए एक भगवान की तरह है। हमें डॉक्टर का आभारी होना चाहिए। हमें उसका सम्मान करना चाहिए।
ज़िले में कोरोना संक्रमण के मरीज़ नियमित आ रहे हैं पर उन्हें समुचित उपचार प्रदान कर स्वस्थ कर वापस भेजने का बीड़ा भी पूरी मुस्तैदी, सजगता, दक्षता, समर्पण एवं संवेदना से स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सकीय टीम एवं सहायक मेडिकल स्टाफ़ द्वारा उठा कर रखा गया है। दिन रात की परवाह न करते हुए निरंतर अनूपपुर को कोरोना मुक्त कराने में लगे हुए है ये कोरोना योद्धा। न केवल उपचार बल्कि मरीज़ों एवं परिजनों का मनोबल बढ़ाने में भी पूरी संवेदना का परिचय इनके द्वारा दिया जा रहा है।
                  इनमें से कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जो स्वयं कोरोना से ग्रसित हुए पर अपने आत्मबल से उन्होंने कोरोना को हराया और फिर लौट आए अनूपपुर की सेवा में। कोई बीपी सुगर एवं अन्य सहरुग्णताओं से ग्रसित है फिर भी उन्होंने जनसेवा के अपने संकल्प में एक भी कदम पीछे नही आने दिए बल्कि संकट की इस घड़ी में उनमें दुगुनी ऊर्जा का संचार परिलक्षित हुआ।
                              ऐसे में उनकी इस सेवा भावना एवं निहित ऊर्जा निः संदेह सामान्य मनुष्य के लिए सोचने का विषय है। इसी जिज्ञासा को लिए जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.सी. राय एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस.आर.पी. द्विवेदी से संवाद किया गया और जानना चाहा कि आप ऐसी ऊर्जा कैसे ला रहे हैं तो जो उत्तर प्राप्त हुआ उससे मानवता की उच्च परिकाष्ठा से साक्षात्कार होने का अनुभव प्राप्त हुआ।
                     उन्होंने बड़ी ही सहजता से उत्तर देते हुए कहा  आजीवन अनूपपुर ज़िले की सेवा के दौरान हमें सम्मान प्राप्त हुआ मान प्राप्त हुआ। आज जब अनूपपुर को हमारी ज़रूरत है तो हम कैसे पीछे हट जाएँ।
                कृतज्ञता एवं सरलता मानव का विशिष्ट आभूषण है ये दोनो शब्द आज और भी सुशोभित हो गए। मानव में असीम ऊर्जा है वह अपनी निहित ऊर्जा से किसी भी समस्या से निजात पा सकता है। आवश्यकता है अपने असीम मनोबल को पहचानने की उसके अनुरूप आचरण करने की।
         ज़िले की सेवा में लगे इन कोरोना योद्धाओं के प्रति हर नागरिक का ऋण है। कोरोना संक्रमण की समस्या से निजात पाना है तो हमें भी इनके प्रति कृतज्ञ होना होगा। इनके कंधे के साथ कंधा मिलाकर कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हेतु योग, प्राणायाम, गर्म पानी पीना, भाप लेना अन्य उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा। स्वास्थ्य लक्षण की निगरानी कर सही समय में चिकित्सकीय स्टाफ़ को सूचित करना होगा, ताकि सही समय में उपचार मुहैया कराया जा सके एवं संक्रमण के दुष्प्रभावों से बचा जा सके।
       आइए हम सभी प्रण लें अनूपपुर को कोरोना मुक्त करने हेतु हम सब कोई कसर बाक़ी नहीं छोड़ेंगे। हम सभी मिलकर कोरोना को हराएँगे।कोरोना हारेगा आत्मविश्वास, संयम, मनोबल, अनुशासन के साथ अनूपपुर जीतेगा।

सरकारी सेवा में आए 
थे सेवा करके छा गए

डॉक्टर एस.सी.राय जो आज जिला चिकित्सालय में सीएमएचओ के पद पर आसीन है एवं डॉ. एस.आर.पी.द्विवेदी जो रिटायर सरकारी नौकरी से हो चुके फिर भी सरकारी चिकित्सालय में अपनी सेवाएं निरंतर दे रहे हैं।दोनों ही डॉक्टरों ने कभी जीवन में नहीं सोचा था की अनूपपुर उनकी कर्मभूमि बन जाएगी।सरकारी नौकरी में आए थे एक अच्छे चिकित्सक के रूप में अपनी पहचान बनाई और पहचान आज उनकी कर्मभूमि अनूपपुर बन गई दोनों ही चिकित्सक सेवा करके लोगों के मध्य छा गए। आज कोविड-19 में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना निरंतर कोरोना मरीज की सेवा में अपना समय दे रहे हैं।

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