अनूपपुर (ब्यूरो)भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है।जिसमें अलग-अलग धर्म,जाति के लोग जहाँ एक साथ रहते हैं। इसी के साथ रहती है उनकी विभिन्न मान्यताएं,भाषा, वेशभूषा,औजार आदि।समय के साथ बदलते परिवेश में जहाँ एक ओर हमने तरक्की की तो वहीँ दूसरी ओर अपनी मूलभूत पहचान-हमारी संस्कृति को भी पीछे छोड़ते जा रहे हैं।
अजय अग्रवाल,पर्यटन प्रबंधक,म.प्र.टू.बो.अनूपपुर इस विषय पर और अधिक प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि देश में कुछ प्रजातियाँ तो ऐसी हैं जिन्हें विशेष संरक्षण की आवश्यकता है और विलुप्त होती प्रजाति, संस्कृति की श्रेणी में आती हैं।मध्यप्रदेश का अनूपपुर जिला ऐसी ही विशेष जनजाति,प्राकृतिक और संस्कृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। जिले में मूलतः गोंड,अगरिया,कोल,बिंझवार,पनिका एवं बैगा आदि जनजातीय वर्ग के लोग रहते हैं।जिनकी उपयोगिता,मान्यताएं एवं सांस्कृतिक गतिवधियां विशेष महत्त्व लिए अपने आप में ही अनूठी हैं और बदलते परिवेश के साथ इनका संरक्षण भी आवश्यक है।ताकि हमारी आने वाली पीढियों को हम अपनी विरासत सौंप सकें और ऐसा करने में संग्रहालयों की विशेष भूमिका रही है।
पर्यटन स्थल अमरकंटक से महज 18 कि.मी.की दूरी पर स्थित जनजातीय वि. वि. के ट्राइबल म्यूजियम में जिले में पाई जाने वाली विशेष जनजातीय धरोहरों को संजो कर रखा गया है।जैसे कि पहनावा,आभूषण, औषधीय वस्तुएं, जिले में बनाई जाने वाले मिट्टी के बर्तन,बांस से बनाई गई वस्तुएं,अपने और पालतू जानवरों,बैलगाड़ी हेतु की साज- सज्जा की वस्तुएं,कृषि एवं शिकार में इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरण व औजारवाद्ययंत्र, मुखौटे आदि दर्शनीय हैं।
अजय अग्रवाल,पर्यटन प्रबंधक,म.प्र.टू.बो.अनूपपुर इस विषय पर और अधिक प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि देश में कुछ प्रजातियाँ तो ऐसी हैं जिन्हें विशेष संरक्षण की आवश्यकता है और विलुप्त होती प्रजाति, संस्कृति की श्रेणी में आती हैं।मध्यप्रदेश का अनूपपुर जिला ऐसी ही विशेष जनजाति,प्राकृतिक और संस्कृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। जिले में मूलतः गोंड,अगरिया,कोल,बिंझवार,पनिका एवं बैगा आदि जनजातीय वर्ग के लोग रहते हैं।जिनकी उपयोगिता,मान्यताएं एवं सांस्कृतिक गतिवधियां विशेष महत्त्व लिए अपने आप में ही अनूठी हैं और बदलते परिवेश के साथ इनका संरक्षण भी आवश्यक है।ताकि हमारी आने वाली पीढियों को हम अपनी विरासत सौंप सकें और ऐसा करने में संग्रहालयों की विशेष भूमिका रही है।
पर्यटन स्थल अमरकंटक से महज 18 कि.मी.की दूरी पर स्थित जनजातीय वि. वि. के ट्राइबल म्यूजियम में जिले में पाई जाने वाली विशेष जनजातीय धरोहरों को संजो कर रखा गया है।जैसे कि पहनावा,आभूषण, औषधीय वस्तुएं, जिले में बनाई जाने वाले मिट्टी के बर्तन,बांस से बनाई गई वस्तुएं,अपने और पालतू जानवरों,बैलगाड़ी हेतु की साज- सज्जा की वस्तुएं,कृषि एवं शिकार में इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरण व औजारवाद्ययंत्र, मुखौटे आदि दर्शनीय हैं।

0 Comments