(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर एवं सीआईसी रेल सेक्शन का महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन अनूपपुर है।बताया
जाता है कि यह जंक्शन स्टेशन ही नहीं है इसके साथ ही इसे माडल स्टेशन का दर्जा भी मिला हुआ है।लेकिन वर्षों से यह स्टेशन रेल अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार है। जो दर्जा अनूपपुर स्टेशन को मिला हुआ है उसके अनुरूप यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म क्रमांक एक एवं दो की बात हो या फिर प्लेटफार्म क्रमांक तीन एवं चार यहाँ वर्षा और धूप से बचाव के लिए पूरे प्लेटफार्म पर शेड जरूरी हैं। देखा जा रहा है कि अधिकांश स्थानों पर शेड नहीं होने से धूप एवं बारिश में यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।वही देखा जाता है कि सभी ट्रेनों में पार्सल की बोगी आगे एवं पीछे तरफ रहती है वहां पर भी शेड की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे बाहर से आने वाला पार्सल या तो उतर नहीं पाता बारिश के मौसम में या फिर भीग जाता है जिससे नुकसान होता है नहीं देखा जाता है कि जनरल बोगी अधिकांश आगे एवं पीछे रहती है वर्षा और भीषण गर्मी के मौसम में यात्रियों को ट्रेन के आगे और पीछे वाले बोगी में सवार होकर यात्रा करने वाले मुसाफिरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है उन्हें धूप एवं बारिश में खड़े होकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे स्टेशन के दोनों प्रमुख प्लेटफार्मो के केवल मध्य वाले हिस्से में छाया शेड बने हुए हैं। इन हिस्सों में केवल कुछ स्लीपर एवं एसी कोच आकर रुकते हैं जिनमें कुछ ही यात्री शेड के नीचे खड़े हो पाते हैं। ट्रेन के आगे और पीछे के हिस्सों में जहां सबसे अधिक रेलयात्री ट्रेन का इंतजार करते हुए खड़े रहते हैं वहां वर्षा और धूप से बचाव के कोई इंतजाम नहीं रहते जिससे
अक्सर वर्षा होने के दौरान यात्रियों को ट्रेन आने पर भीगते हुए गाड़ी में सवार होना पड़ता है। जिससे यात्रा की शुरुआत ही लोगों को रेल की लचर व्यवस्था को कोसते हुए करनी पड़ती है। पिछले दो दशक से अनूपपुर को माडल स्टेशन का दर्जा मिला हुआ है लेकिन नाम के अनुरूप यहां सुविधाएं नहीं है। जब भी रेलवे के अधिकारी वार्षिक निरीक्षण या फिर अन्य मौके पर आए हैं ज्ञापन देकर इस मामले से अवगत कराते हुए सुविधा की मांग रखी जा चुकी है लेकिन अधिकारी जरूरी सुविधा यहां मुहैया कराने के प्रति नजरअंदाज जैसा कार्य करते आ रहे हैं जिसके कारण अनूपपुर इस सुविधा से वंचित है। वर्षा काल की तरह गर्मी के दिनों में लोगों को असहनीय धूप का सामना करते हुए ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है जिससे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार खास तौर पर प्रभावित होते हैं।अनूपपुर रेलवे स्टेशन अंतर्गत जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र की करीब 7 लाख की आबादी है इसके अलावा यह जंक्शन छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया, अंबिकापुर जैसे जिलों को जोड़ता है यहां के लोग अनूपपुर से ही बड़ी ट्रेनों से लंबी दूरी की सफर शुरू करते हैं ऐसे में हर रोज यहां सैकड़ों की संख्या में यात्री पहुंचते हैं लेकिन सुविधाएं छोटे स्टेशनों की तरह होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे बोर्ड द्वारा छोटे-छोटे स्टेशनों में ऐसी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। लेकिन इस बड़े स्टेशन की अनदेखी हो रही है जो कि मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन है। जबकि यहां से रेलवे को यात्रियों से प्रतिदिन अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होता है साथ ही यहां के कोयला खदानों से कोयला परिवहन के माध्यम से बड़ा राजस्व रेलवे के कोष में पहुंचता है फिर भी अनूपपुर स्टेशन उपेक्षित बना हुआ है।
जाता है कि यह जंक्शन स्टेशन ही नहीं है इसके साथ ही इसे माडल स्टेशन का दर्जा भी मिला हुआ है।लेकिन वर्षों से यह स्टेशन रेल अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार है। जो दर्जा अनूपपुर स्टेशन को मिला हुआ है उसके अनुरूप यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म क्रमांक एक एवं दो की बात हो या फिर प्लेटफार्म क्रमांक तीन एवं चार यहाँ वर्षा और धूप से बचाव के लिए पूरे प्लेटफार्म पर शेड जरूरी हैं। देखा जा रहा है कि अधिकांश स्थानों पर शेड नहीं होने से धूप एवं बारिश में यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।वही देखा जाता है कि सभी ट्रेनों में पार्सल की बोगी आगे एवं पीछे तरफ रहती है वहां पर भी शेड की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे बाहर से आने वाला पार्सल या तो उतर नहीं पाता बारिश के मौसम में या फिर भीग जाता है जिससे नुकसान होता है नहीं देखा जाता है कि जनरल बोगी अधिकांश आगे एवं पीछे रहती है वर्षा और भीषण गर्मी के मौसम में यात्रियों को ट्रेन के आगे और पीछे वाले बोगी में सवार होकर यात्रा करने वाले मुसाफिरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है उन्हें धूप एवं बारिश में खड़े होकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे स्टेशन के दोनों प्रमुख प्लेटफार्मो के केवल मध्य वाले हिस्से में छाया शेड बने हुए हैं। इन हिस्सों में केवल कुछ स्लीपर एवं एसी कोच आकर रुकते हैं जिनमें कुछ ही यात्री शेड के नीचे खड़े हो पाते हैं। ट्रेन के आगे और पीछे के हिस्सों में जहां सबसे अधिक रेलयात्री ट्रेन का इंतजार करते हुए खड़े रहते हैं वहां वर्षा और धूप से बचाव के कोई इंतजाम नहीं रहते जिससे
अक्सर वर्षा होने के दौरान यात्रियों को ट्रेन आने पर भीगते हुए गाड़ी में सवार होना पड़ता है। जिससे यात्रा की शुरुआत ही लोगों को रेल की लचर व्यवस्था को कोसते हुए करनी पड़ती है। पिछले दो दशक से अनूपपुर को माडल स्टेशन का दर्जा मिला हुआ है लेकिन नाम के अनुरूप यहां सुविधाएं नहीं है। जब भी रेलवे के अधिकारी वार्षिक निरीक्षण या फिर अन्य मौके पर आए हैं ज्ञापन देकर इस मामले से अवगत कराते हुए सुविधा की मांग रखी जा चुकी है लेकिन अधिकारी जरूरी सुविधा यहां मुहैया कराने के प्रति नजरअंदाज जैसा कार्य करते आ रहे हैं जिसके कारण अनूपपुर इस सुविधा से वंचित है। वर्षा काल की तरह गर्मी के दिनों में लोगों को असहनीय धूप का सामना करते हुए ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है जिससे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार खास तौर पर प्रभावित होते हैं।अनूपपुर रेलवे स्टेशन अंतर्गत जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र की करीब 7 लाख की आबादी है इसके अलावा यह जंक्शन छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया, अंबिकापुर जैसे जिलों को जोड़ता है यहां के लोग अनूपपुर से ही बड़ी ट्रेनों से लंबी दूरी की सफर शुरू करते हैं ऐसे में हर रोज यहां सैकड़ों की संख्या में यात्री पहुंचते हैं लेकिन सुविधाएं छोटे स्टेशनों की तरह होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे बोर्ड द्वारा छोटे-छोटे स्टेशनों में ऐसी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। लेकिन इस बड़े स्टेशन की अनदेखी हो रही है जो कि मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन है। जबकि यहां से रेलवे को यात्रियों से प्रतिदिन अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होता है साथ ही यहां के कोयला खदानों से कोयला परिवहन के माध्यम से बड़ा राजस्व रेलवे के कोष में पहुंचता है फिर भी अनूपपुर स्टेशन उपेक्षित बना हुआ है।


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