आईजीएनटीयू में वर्चुअल
माध्यम से हुआ भवनों का लोकार्पण
(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में नवनिर्मित भवनों का लोकार्पण वर्चुअल माध्यम से हुआ जिसमें मुख्य अतिथि माननीय केन्दीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, विशिष्ट अतिथि माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश)शिवराज सिंह चौहान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के माननीय कुलाधिपति डॉ. मुकुल ईश्वरलाल शाह, विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद तथा विद्या परिषद के सम्मानित सदस्यगण, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. आलोक श्रोत्रिय, विभिन्न संकायों के अधिष्ठातागण, विभिन्न विभागों के अध्यक्षगण, समस्त शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, विद्यार्थी, किसान एवं समीपवर्ती गांव के जनजाति समुदाय से बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन सरस्वती वंदना एवं कुलगीत के माध्यम से हुई। कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर आलोक श्रोत्रिय द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई तत्पश्चात नवनिर्मित भवनों की जानकारी दी गई जिसमें शैक्षणिक आवासीय भवन तथा कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि उपज भंडारण गृह है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा हुए उत्कृष्ट कार्यों को वर्णित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की चर्चा की गई साथ में अजीवीका कौशल विकास केंद्र द्वारा जनजातीय क्षेत्र में चलाये जा रहे विकास कार्यों का वर्णन किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. मुकुल ईश्वर लाल शाह द्वारा विश्वविद्यालय में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों को पटल पर रखा गया और नवनिर्मित भवनों को विश्वविद्यालय की आवश्यकता बताया। उन्होंने इस बात की प्रसन्नता व्यक्त की, कि विश्वविद्यालय अध्ययन-अध्यापन कार्य उत्कृष्ट स्तर का हो रहा है।
आज के कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शिवराज सिंह चौहान द्वारा वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपने उद्बोधन में कहा कि यह विश्वविद्यालय जनजाति कला साहित्य संस्कृति और कौशल का संरक्षण करते हुए उसका आधुनिक ज्ञान के साथ समन्वय एवं समायोजन करने तथा आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने के ध्येय को लेकर ज्ञान-विज्ञान की विविध विधाओं के सम्यक अध्ययन-अध्यापन में संलग्न है।उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय जनजातीय भाई बहनों को उन्हीं की कला में पारंगत कर रहा है और अपने पाठ्यक्रम में जनजातीय विषयों को शामिल कर रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा यहां के जनजातीय नायकों में बिरसा मुंडा से लेकर मध्य प्रदेश के तमाम जनजातीय नायकों को याद किया गया।
आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, भारत सरकार अमित शाह द्वारा वर्चुअल माध्यम से जुड़कर सर्वप्रथम नवनिर्मित भवनों का वर्चुअल लोकार्पण किया गया तत्पश्चात अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलपति एवं कार्यक्रम संयोजक तथा संचालक को बधाई देते हुए विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि मध्यप्रदेश की धरा में जनजातीय नायकों से भरी हुई क्योंकि आजादी की लड़ाई में इनके द्वारा अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए गए थे। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय इन नायकों को अपने अध्ययन में शामिल कर रहा है और जनजातीयों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है, विश्वविद्यालय का एक केंद्र मणिपुर में स्थित है मणिपुर और पूरा पूर्वोत्तर राज वीर जनजातीय नायकों की जमीन है। इन गुमनाम जनजातीय नायकों पर शोध कार्य होना चाहिए और उन पर केंद्रित कार्यक्रम होने चाहिए। जिससे जनजातीयों का गौरव बढ़ेगा। आपने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को गुरु गोविंद सिंह जी की उक्ति को बताया कि बारिश के मौसम में पक्षी पानी से बचने के लिए जमीन पर आश्रय लेते हैं जबकि बाज एक ऐसा पक्षी है जो बारिश से बचने के लिए बादलों के ऊपर उड़ता है। अर्थात समस्या ही समाधान है अतः आप समस्या में समाधान ढूंढिए। अपने उद्बोधन में आपने केंद्र सरकार द्वारा जनजातियों के लिए किए जा रहे शासकीय कार्यों जैसे स्वच्छ भारत मिशन, शौचालय निर्माण, छात्रवृत्ति वितरण, एकलव्य जनजातीय विद्यालय, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा अन्य योजनाओं में भारत सरकार की उपलब्धियों की जानकारी प्रस्तुत की और बताया कि विगत 7 वर्षों में सरकार ने जनजातीय समुदाय के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव पी.सिलुवैनाथन द्वारा दिया गया। मंच संचालन डॉ. ऋषी पालीवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम की समाप्ति राष्ट्रगान के साथ हुई।

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