(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) पूर्व जिला कांग्रेसाध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल के नेतृत्व में जैतहरी क्षेत्र के काफी संख्या में नागरिकों ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जैतहरी के स्टेशन मास्टर को रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि कोविड काल के पूर्व जिन ट्रेनों का ठहराव जैतहरी रेलवे स्टेशन में था उसे तत्काल वापस प्रारंभ कराया जाए। उन्होंने इसकी प्रतिलिपि महाप्रबंधक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर, डीआरएम दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर, कलेक्टर जिला अनूपपुर,पुलिस अधीक्षक जिला अनूपपुर को भी प्रेषित किया है।उन्होंने अपने ज्ञापन में लेख किया है कि जैतहरी रेल्वे स्टेशन दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे जोन का महत्वपूर्ण रेल्वे स्टेशन है, जैतहरी जनपद क्षेत्र के लगभग 100 गांव के हजारों यात्रियों का प्रतिदिन ट्रेनों के माध्यम से आना-जाना करते हैं।जैतहरी स्टेशन के समीप मोजर बेयर पावर प्लांट स्थापित है जहां लगभग 5000 लोग कार्यरत हैं जो देश के विभिन्न क्षेत्रों में आना जाना करते हैं। साथ ही जैतहरी में तहसील मुख्यालय,महाविद्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जनपद मुख्यालय लगभग, 15 हायर सेकण्डरी स्कूल, नगर परिषद कार्यालय, समस्त विभागों का ब्लॉक मुख्यालय है।जहां अपने शुरूआती समय से प्रमुख यात्री ट्रेनों का ठहराव रहा है जिससे हजारों लोग प्रतिदिन विभिन्न ट्रेनों से आवागमन करते रहे हैं। जैतहरी क्षेत्र आदिवासी एवं किसान बाहुल्य क्षेत्र है जहां गरीब तबके के लोग निवास करते हैं। रेल्वे की ट्रेनों के माध्यम से क्षेत्र के लोग कम खर्च पर अपने गंतव्य को जाते थे किन्तु 23 मार्च 2020 को कोविड महामारी के कारण पूरे देश में यात्री ट्रेने बंद की गयी उसके पश्चात देश में स्थिति सामान्य होने पर अधिकतर यात्री ट्रेनों का पूर्ववत संचालित किया गया किन्तु दुर्भाग्यवश जैतहरी जैसे महत्वपूर्ण रेल्वे स्टेशन में यात्री ट्रेनों का ठहराव नहीं दिया गया।जिसके कारण क्षेत्र के आदिवासी, गरीब, किसान, छात्रों, व्यापारियों एवं मरीजों को यात्री ट्रेन पकड़ने के लिए अनूपपुर या पेण्ड्रारोड तक किराये की टैक्सी या अन्य वाहनों के माध्यम से जाना पड़ता है जिसमें 500 से 700 रूपये तक अतिरिक्त आर्थिक बोझ व अनावश्यक समय खर्च करना पड़ता है जो कि इस क्षेत्र की गरीब जनता के साथ अन्याय है।
इस संबंध में कई बार लगातार विभिन्न संगठनों के द्वारा रेल प्रशासन एवं सांसद, विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों से उक्त संबंध में अनुरोध किया गया किन्तु आज दिनांक तक जैतहरी रेल्वे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेन 18233-18234,18235-18236, 18247-18248, 18477-18478, 18241-18242, 18257-18258 ट्रेनों का ठहराव जैतहरी में नहीं दिया गया है जो कि जैतहरी क्षेत्र की जनता के साथ घोर अन्याय है। उक्त ट्रेनों का जबसे परिचालन शुरू हुआ है तब से जेतहरी में स्टापेज रहा है किन्तु वर्तमान में स्टापेज न होने से क्षेत्र की जनता अपने आप को ठगा एवं असहाय महसूस करते हुए आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है।
उन्होंने रेल मंत्री से एवं संबंधित लोगों से मांग की है कि क्षेत्रीय जनता की भावनाओं, आर्थिक क्षति एवं परेशानियों को देखते हुए अतिशीघ्र जैतहरी स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेन 18233-18234,18235-18236, 18247-18248, 18477-18478, 18241-18242, 18257-18258 ट्रेनों का पूर्ववत ठहराव जैतहरी स्टेशन में प्रदान करने की कृपा करें।अन्यथा की स्थिति में मजबूर होकर जैतहरी क्षेत्र की जनता को रेल रोको आंदोलन, मोजर बेयर एवं अन्य कोयला की ट्रेनों को रोकने जैसे कड़े निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी रेल्वे प्रशासन की होगी।
इस संबंध में कई बार लगातार विभिन्न संगठनों के द्वारा रेल प्रशासन एवं सांसद, विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों से उक्त संबंध में अनुरोध किया गया किन्तु आज दिनांक तक जैतहरी रेल्वे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेन 18233-18234,18235-18236, 18247-18248, 18477-18478, 18241-18242, 18257-18258 ट्रेनों का ठहराव जैतहरी में नहीं दिया गया है जो कि जैतहरी क्षेत्र की जनता के साथ घोर अन्याय है। उक्त ट्रेनों का जबसे परिचालन शुरू हुआ है तब से जेतहरी में स्टापेज रहा है किन्तु वर्तमान में स्टापेज न होने से क्षेत्र की जनता अपने आप को ठगा एवं असहाय महसूस करते हुए आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है।
उन्होंने रेल मंत्री से एवं संबंधित लोगों से मांग की है कि क्षेत्रीय जनता की भावनाओं, आर्थिक क्षति एवं परेशानियों को देखते हुए अतिशीघ्र जैतहरी स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेन 18233-18234,18235-18236, 18247-18248, 18477-18478, 18241-18242, 18257-18258 ट्रेनों का पूर्ववत ठहराव जैतहरी स्टेशन में प्रदान करने की कृपा करें।अन्यथा की स्थिति में मजबूर होकर जैतहरी क्षेत्र की जनता को रेल रोको आंदोलन, मोजर बेयर एवं अन्य कोयला की ट्रेनों को रोकने जैसे कड़े निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी रेल्वे प्रशासन की होगी।

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