(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंंचलधारा) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में "स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस तथा युवा दिवस" के उपलक्ष्य में "स्वामी विवेकानंद के दर्शन की पृष्ठभूमि में भारतीय युवाओं के मुद्दे और सरोकार" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेविनार का सफल आयोजन विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय द्वारा किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि प्रोफेसर राजकुमार आचार्य, कुलपति अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा थे। उन्होंने विवेकानंद के उन पहलुओं पर चर्चा की जो युवाओं के लिए प्रेरक है। अपने व्यख्यान में आपने बताया कि "भारत सिर्फ सबसे बड़ी युवा आबादी का देश नहीं है बल्कि भारत का युवा पूरी दुनिया में सर्वाधिक कार्यशील भी है। नई शिक्षा नीति विवेकानंद के आदर्शों को ध्यान में रख कर बनाई गई है। विवेकानंद भारत से इतना प्यार करते थे, कि जब वो शिकागो से बापस भारत आये तो जहाज से उतार कर उन्होंने सबसे पहले मातृभूमि को प्रणाम किया फिर उसमें लौटने लगे, एसे थे विवेकानंद अतः आज के युवा को उनका अध्ययन करना अनिवार्य है।"
कार्यक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रोफेसर श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी थे। अपने उद्बोधन में विस्तारपूर्वक स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि " वैचारिक पवित्रता एवं निस्वार्थता ही हमारा धर्म है। आत्म मंथन कर सही और गलत का निर्णय कर सहनशीलता के मार्ग पर चलना भारत वासियों की विशिष्टिता है। मनुष्यता ही भारत का दर्शन है। इसीलिए स्वामी विवेकानंद ने नर को नारायण माना। युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द रहे हैं। स्वामी जी से प्रेरणा लेकर युवा भारत के भविष्य को परिवर्तित कर सकते हैं। खासकर इस जनजातीय क्षेत्र में युवाओं को बढ़ चढ़ कर आगे आना चाहिए। ताकि यह क्षेत्र विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके और विकास की धारा शिक्षा के माध्यम से पूरी होती है जिसके लिए जनजातीय विश्वविद्यालय सदैव तत्पर है।"
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश एम. ने किया और स्वागत प्रोफेसर एम.टी.वी. नागार्जुन (अधिष्ठाता शिक्षा संकाय) ने किया और आभार प्रदर्शन प्रोफेसर ज्ञानेंद्र कुमार राउत ने दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव पी. सिलुवेनाथन, प्रो. तरुण ठाकुर, प्रो. अनुपम शर्मा सहित अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष एवं विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से दर्ज कराई।
जबकि दूसरा कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित 75 करोड़ सूर्य नमस्कार परियोजना कार्य के अंतर्गत 12 जनवरी 2022 से प्रतिदिन, 21 दिन तक तेरा आवृत्ति सूर्य नमस्कार करने के कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के योग संकाय और योग विभाग द्वारा हुआ। इसके लिए विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति माननीय प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी ने सभी साधकों को संकल्प दिलाकर योगाभ्यास और सूर्यनमस्कार की विधा को जीवनचर्या का अंग बनाने के लिये प्रेरित किया था। इस कार्यक्रम में प्रतिदिन 13 सूर्यनमस्कार आवृतियों को 21 दिन तक करना है, अर्थात एक साधक को 273 आवृत्तियाँ करने का संकल्प हैं। इस पर योग संकाय और योग विभाग द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉक्टर सत्य प्रकाश पाठक, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय थे। उन्होंने सूर्य नमस्कार की महत्ता उसका इतिहास और सूर्य नमस्कार से आयु,प्रज्ञा और बल की प्राप्ति के साथ-साथ सर्वरोगविनाशकम की महत्ता को बताते हुए जीवन में सूर्य नमस्कार के अभ्यास पर बल दिया।
डॉ.श्याम सुंदर पाल द्वारा सूर्यनमस्कार की तेरह आवृतियों का अभ्यास कराया गया। इस कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रोफेसर जितेंद्र शर्मा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हरेराम पांडे ने दिया। इस संपूर्ण कार्यक्रम में लगभग 60 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभाग किया। योग विभाग के सभी अध्यापक गण डॉ.प्रवीण कुमार गुप्ता, डॉ. नीलम श्रीवास्तव डॉ.संदीप ठाकरे, डॉ.श्याम सुंदर पाल आदि उपस्थित थे।
कार्यक्रम के संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रोफेसर श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी थे। अपने उद्बोधन में विस्तारपूर्वक स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि " वैचारिक पवित्रता एवं निस्वार्थता ही हमारा धर्म है। आत्म मंथन कर सही और गलत का निर्णय कर सहनशीलता के मार्ग पर चलना भारत वासियों की विशिष्टिता है। मनुष्यता ही भारत का दर्शन है। इसीलिए स्वामी विवेकानंद ने नर को नारायण माना। युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द रहे हैं। स्वामी जी से प्रेरणा लेकर युवा भारत के भविष्य को परिवर्तित कर सकते हैं। खासकर इस जनजातीय क्षेत्र में युवाओं को बढ़ चढ़ कर आगे आना चाहिए। ताकि यह क्षेत्र विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके और विकास की धारा शिक्षा के माध्यम से पूरी होती है जिसके लिए जनजातीय विश्वविद्यालय सदैव तत्पर है।"
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश एम. ने किया और स्वागत प्रोफेसर एम.टी.वी. नागार्जुन (अधिष्ठाता शिक्षा संकाय) ने किया और आभार प्रदर्शन प्रोफेसर ज्ञानेंद्र कुमार राउत ने दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव पी. सिलुवेनाथन, प्रो. तरुण ठाकुर, प्रो. अनुपम शर्मा सहित अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष एवं विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से दर्ज कराई।
जबकि दूसरा कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित 75 करोड़ सूर्य नमस्कार परियोजना कार्य के अंतर्गत 12 जनवरी 2022 से प्रतिदिन, 21 दिन तक तेरा आवृत्ति सूर्य नमस्कार करने के कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के योग संकाय और योग विभाग द्वारा हुआ। इसके लिए विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति माननीय प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी ने सभी साधकों को संकल्प दिलाकर योगाभ्यास और सूर्यनमस्कार की विधा को जीवनचर्या का अंग बनाने के लिये प्रेरित किया था। इस कार्यक्रम में प्रतिदिन 13 सूर्यनमस्कार आवृतियों को 21 दिन तक करना है, अर्थात एक साधक को 273 आवृत्तियाँ करने का संकल्प हैं। इस पर योग संकाय और योग विभाग द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉक्टर सत्य प्रकाश पाठक, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय थे। उन्होंने सूर्य नमस्कार की महत्ता उसका इतिहास और सूर्य नमस्कार से आयु,प्रज्ञा और बल की प्राप्ति के साथ-साथ सर्वरोगविनाशकम की महत्ता को बताते हुए जीवन में सूर्य नमस्कार के अभ्यास पर बल दिया।
डॉ.श्याम सुंदर पाल द्वारा सूर्यनमस्कार की तेरह आवृतियों का अभ्यास कराया गया। इस कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रोफेसर जितेंद्र शर्मा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हरेराम पांडे ने दिया। इस संपूर्ण कार्यक्रम में लगभग 60 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभाग किया। योग विभाग के सभी अध्यापक गण डॉ.प्रवीण कुमार गुप्ता, डॉ. नीलम श्रीवास्तव डॉ.संदीप ठाकरे, डॉ.श्याम सुंदर पाल आदि उपस्थित थे।
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