(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर। (अंचलधारा) न्यायालय द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार शर्मा की न्यायालय ने सहआरोपी श्रीमती यासमीन पत्नी अलीम खान निवासी लाटुस रोड बासमंण्डी अनवरगंज थाना अनवरंगज जिला कानपुर की जमानत याचिका निरस्त की गई।
मीडिया प्रभारी राकेश पाण्डेय ने सहायक जिला अभियोजन अधिकारी कोतमा राजगौरव तिवारी के हवाले से बताया की मामला थाना भालूमाडा के अ.क्र. 270/20 धारा 376, 344, 363, 386,120बी, 506 भादवि से संबंधित है मुख्य आरोपी के द्वारा पीडिता के साथ जबरन जबरदस्ती कर उसे गर्भवती कर देना तथा पीडिता की गर्भपात कराने की बात करने पर पीडिता को जान से मारने की धमकी दिया पीडिता के द्वारा दिनांक 13/07/2020 को एक लडके के जन्म दिया जिसके बाद पीडिता को बाबू पुरवा नाम की जगह पर अपने किराये के घर पर ले गया जहां पीडिता को एक कमरे में बंद कर दिया और जंहा पर सहआरोपी यासमीन खान के द्वारा पीडिता के जेबर एवं नवजात बच्चे को छीन लिया गया जैसे तैसे भागकर पीडिता घर आई इस दौरान थाना भालूमाडा में गुम इंसान क्रमांक 21/20 दर्ज हो गई थी जिसमें थाना भालूमाडा द्वारा पीडिता की दस्तयाबी कर उक्तानुसार अपराध दर्ज कर मामले का विवेचना में लिया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
आरोपी ने यह लिया था आधार-आवेदिका द्वारा जमानत आवेदन में आवेदिका को झूठा फसाया गया है आवेदिका की चल एवं अचल संपत्ती अनवरगंज थाना जिला कानपुर में उसे भागने एवं फरार होने की संभावना नही है उक्त अपराध के निराकरण में काफी समय लगने की पूर्ण संभावना है इसलिए जमानत का लाभ दिया जाए।
अभियोजन ने इस आधार पर किया था विरोध-उक्त आवेदन पत्र अपर लोक अभियोजक शैलेन्द्र सिंह द्वारा जमानत आवेदन का इस आधार पर विरोध किया गया कि अपराध सहआरोपी द्वारा अपराध में षडयंत्र करने एवं पीडिता के जेबर तथा अपराध के परिणामस्वरूप जन्में बच्चे को अपने पास रख लेने का अपराध करना पाया जाने पर गिरफ्तार किया गया आवेदिका की गिरफ्तारी घारा 363, 368 सहपठित धारा 120बी भादवि के अजमानतीय अपराध में की गयी है, अपराध गंभीर प्रकृति का है एवं जेवरात बरामद किया जाना शेष है, प्रकरण विवेचना स्तर पर है सहआरोपी को जमानत का लाभ दिए जाने पर वह साक्ष्य प्रभावित कर सकता है व फरार हो सकती है। उभयपक्षों के तर्को को सुनने के पश्चात माननीय न्यायालय द्वारा अभियोजन के तर्को से सहमत होते हुए आरोपी की जमानत याचिका अंतर्गत धारा 439 द.प्र.स. निरस्त कर दिया।
न्यायिक दण्डाधिकारी ने भी पूर्व में किया था धारा 437 द.प्र.स. का आवेदन निरस्त इसी मामले में आरोपिया द्वारा न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी श्रीमती सिखा दुबे के न्यायालय में भी अंतर्गत धारा 437द.प्र.स. के अंर्तगत जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था जिसमें अभियोजन अधिकारी राजगौरव तिवारी द्वारा न्यायालय के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत की थी उक्त आवेदन को माननीय न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया था।

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