(हिमांशू बियानी/जिला ब्यूरो)
अनूपपुर (अंचलधारा) 1 मई 1995 मे कच्ची झोपड़ी मे स्वामी विवेकानंद के नाम से संचालित शाला ग्राम लालपुर मे मां शारदा कन्या विद्यापीठ 16 बैगा बच्चियों को लेकर यात्रा शुरू हुई जिस यात्रा के संचालक डॉ. प्रवीण सरकार ने अथक प्ररिश्रम करना प्रारंभ किया। डॉ. प्रवीण सरकार 16 बैगा जनजाति के बच्चियों को शिक्षा ग्रहण कराते हुये कभी पीछे मुड़कर नही देखा सदैव आगे की ओर कदम बढ़ाते हुये सतत् प्रयास मे निरंतर बढ़ते चले गये। डॉक्टर प्रवीण सरकार ने जिले से लेकर संभाग तक संभाग से प्रदेश
तक प्रदेश से दिल्ली तक चलकर मां शारदा कन्या विद्यापीठ के लिये संघर्ष करते रहे। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है के रास्ते पर चलकर जिसका यह परिणाम है कि मां शारदा कन्या विद्यापीठ आज वर्तमान समय मे ग्राम लालपुर से पोड़की पहुंचकर अपने विशाल पक्के भवन मे स्थापित हो सैकड़ों बैगा जनजाति के बालिकाओं को शिक्षा ग्रहण कराने के लिये शहडोल संभाग मे एक ऐसी विद्यापीठ स्थापित हो चुकी है जो शासकीय अशासकीय विद्यालयों के लिये एक अनुकरणीय कहा जा सकेगा। बताया जाता है कि मां शारदा कन्या विद्यापीठ शाला मे शिक्षा अध्ययन कर रहीं बालिकायें जो सन् 1995 मे बैगा जनजाति छात्राओं की संख्या 16 थी जो वर्तमान समय मे 100 की संख्या मे पहुंचकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। एवं शासन की सभी योजनाओं का लाभ देते हुये मां शारदा कन्या विद्यापीठ सर्व सुविधा मुहैया करा रही है। बैगा जनजाति छात्राओं के लिये छात्रावास, भोजन, गणवेष, स्वास्थ के लिये दवाईयां, खेल के लिये मैदान एवं बाउंड्रीवॉल, अतिथियों के लिये गेस्टहाउस आदि के साथ सारी व्यवस्था मां शारदा कन्या विद्यापीठ के द्वारा की जाकर शैक्षणिक बनाये जाने मे उपरोक्त विद्यापीठ सदैव अग्रणी रही है। वहीं विद्यापीठ द्वारा सायंकालीन प्रौढ़ शिक्षा का भी कार्यक्रम संपन्न किया जाकर उपरोक्त जनजातियों को शिक्षित किया जा रहा है, जिसका सारा भार विद्यालय द्वारा वहन किया जाता है। मां शारदा कन्या विद्यापीठ की छात्रायें प्रार्थनाकाल से लेकर सायं काल तक विद्यालय मे ही रहकर स्वामी विवेकानंद के नाम से संचालित मां शारदा कन्या विद्यापीठ पोड़की के अनुशासन मे रहकर स्वामी विवेकानंद जी के उन आदर्शों के अनुरुप मां शारदा कन्या विद्यापीठ गरिमा के अनुसार पठन पाठन कर बैगा जनजाति की ग्रामीण अंचलों के पहाड़ों मे निवास करने वाली छात्रायें अपने गांव से लेकर जनपद, जिला, संभाग, प्रदेश एवं दिल्ली जैसे स्थानों मे मां शारदा कन्या विद्यापीठ के द्वारा प्राप्त शिक्षा ग्रहण कर अपने स्कूल एवं जनपद, जिला, संभाग, परदेस का नाम दिल्ली तक पहुंचाकर राष्ट्रपति के पुरस्कारों से पुरस्कृत हो स्वामी विवेकानंद मां शारदा कन्या विद्यापीठ को गौरवान्वित किया है। जो आज शहडोल संभाग के लिये गर्व का विषय है।
तक प्रदेश से दिल्ली तक चलकर मां शारदा कन्या विद्यापीठ के लिये संघर्ष करते रहे। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है के रास्ते पर चलकर जिसका यह परिणाम है कि मां शारदा कन्या विद्यापीठ आज वर्तमान समय मे ग्राम लालपुर से पोड़की पहुंचकर अपने विशाल पक्के भवन मे स्थापित हो सैकड़ों बैगा जनजाति के बालिकाओं को शिक्षा ग्रहण कराने के लिये शहडोल संभाग मे एक ऐसी विद्यापीठ स्थापित हो चुकी है जो शासकीय अशासकीय विद्यालयों के लिये एक अनुकरणीय कहा जा सकेगा। बताया जाता है कि मां शारदा कन्या विद्यापीठ शाला मे शिक्षा अध्ययन कर रहीं बालिकायें जो सन् 1995 मे बैगा जनजाति छात्राओं की संख्या 16 थी जो वर्तमान समय मे 100 की संख्या मे पहुंचकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। एवं शासन की सभी योजनाओं का लाभ देते हुये मां शारदा कन्या विद्यापीठ सर्व सुविधा मुहैया करा रही है। बैगा जनजाति छात्राओं के लिये छात्रावास, भोजन, गणवेष, स्वास्थ के लिये दवाईयां, खेल के लिये मैदान एवं बाउंड्रीवॉल, अतिथियों के लिये गेस्टहाउस आदि के साथ सारी व्यवस्था मां शारदा कन्या विद्यापीठ के द्वारा की जाकर शैक्षणिक बनाये जाने मे उपरोक्त विद्यापीठ सदैव अग्रणी रही है। वहीं विद्यापीठ द्वारा सायंकालीन प्रौढ़ शिक्षा का भी कार्यक्रम संपन्न किया जाकर उपरोक्त जनजातियों को शिक्षित किया जा रहा है, जिसका सारा भार विद्यालय द्वारा वहन किया जाता है। मां शारदा कन्या विद्यापीठ की छात्रायें प्रार्थनाकाल से लेकर सायं काल तक विद्यालय मे ही रहकर स्वामी विवेकानंद के नाम से संचालित मां शारदा कन्या विद्यापीठ पोड़की के अनुशासन मे रहकर स्वामी विवेकानंद जी के उन आदर्शों के अनुरुप मां शारदा कन्या विद्यापीठ गरिमा के अनुसार पठन पाठन कर बैगा जनजाति की ग्रामीण अंचलों के पहाड़ों मे निवास करने वाली छात्रायें अपने गांव से लेकर जनपद, जिला, संभाग, प्रदेश एवं दिल्ली जैसे स्थानों मे मां शारदा कन्या विद्यापीठ के द्वारा प्राप्त शिक्षा ग्रहण कर अपने स्कूल एवं जनपद, जिला, संभाग, परदेस का नाम दिल्ली तक पहुंचाकर राष्ट्रपति के पुरस्कारों से पुरस्कृत हो स्वामी विवेकानंद मां शारदा कन्या विद्यापीठ को गौरवान्वित किया है। जो आज शहडोल संभाग के लिये गर्व का विषय है।


0 Comments